आसमान में तूफान! IndiGo के 1700 विमान धरती पर, हवाई अड्डों पर मचा हड़कंप

नई दिल्ली – भारत की सबसे विशाल एयरलाइन कंपनी IndiGo इस वक्त अपने इतिहास के सबसे गंभीर संकट का सामना कर रही है. DGCA द्वारा लागू किए गए ताजा नियमों ने देश की इस दिग्गज विमानन कंपनी की कमर तोड़ कर रख दी है. एक झटके में 1700 से अधिक उड़ानें रद्द होने से पूरे देश में अभूतपूर्व अफरातफरी का माहौल बन गया है.
जब आसमान गिर पड़ा धरती पर
DGCA के नवीनतम weekly rest और night-duty नियमों के प्रभावी होते ही जैसे IndiGo का समूचा परिचालन तंत्र ध्वस्त हो गया. जो कंपनी देश के आकाश में सबसे ज्यादा विमान उड़ाने का गौरव रखती थी, वही आज अपने हजारों विमानों को जमीन पर खड़ा देखने को विवश है. देशभर के हवाई अड्डों पर यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ी है और हर तरफ असंतोष और निराशा का माहौल छाया हुआ है.
हजारों मुसाफिरों की मुश्किलें
इस संकट की सबसे बड़ी मार आम यात्रियों पर पड़ी है. हजारों लोगों की यात्रा योजनाएं धूल में मिल गई हैं. कारोबारी बैठकें रद्द हो रही हैं, पारिवारिक कार्यक्रम स्थगित हो रहे हैं और आपातकालीन यात्राओं पर जाने वाले मुसाफिर बेबस खड़े हैं. एयरपोर्ट्स के काउंटरों पर लंबी कतारें और हताश चेहरे इस संकट की गंभीरता को बयां कर रहे हैं.
कहां कितनी उड़ाने रद्ध ?
- 6 दिसंबर 2025 के लिए हैदराबाद एयरपोर्ट पर इंडिगो की अब तक कुल 69 फ्लाइट्स रद्द की गई हैं जिसमें हैदराबाद एयरपोर्ट GMR पर आगमन करने वाली 26 और यहां से प्रस्थान करने वाली 43 फ्लाइट्स शामिल हैं.
- 6 दिसंबर 2025 को मुंबई एयरपोर्ट पर सुबह 9 बजे तक कुल 109 इंडिगो फ्लाइट रद्द की गई हैं. जिसमें मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (MIAL) पर आने वाली 51 और यहां से जाने वाली 58 फ्लाइट्स शामिल हैं.
- दिल्ली एयरपोर्ट से इंडिगो की 54 डिपार्चर और 52 अराइवल (कुल 106) फ्लाइट्स रद्द की गई हैं.
- आज पुणे एयरपोर्ट पर इंडिगो की 14 आने वाली और 28 जाने वाली उड़ानें रद्द कर दी गईं.
क्या हैं वो नियम जिन्होंने मचाया तहलका?
DGCA ने पायलटों और केबिन क्रू की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कड़े नियम लागू किए हैं. नए नियमों के अनुसार:
- साप्ताहिक विश्राम की अवधि को 36 घंटे से बढ़ाकर 48 घंटे करना अनिवार्य कर दिया गया है
- रात्रिकालीन उड़ानें और तथाकथित ‘रेड-आई’ ऑपरेशंस पर कठोर प्रतिबंध आरोपित किए गए हैं
- ये नियम सभी विमानन कंपनियों पर समान रूप से लागू हैं
संकट की गहराई
यह महज आंकड़ों का खेल नहीं है. 1700 से अधिक रद्द उड़ानों का मतलब है:
- लाखों यात्रियों की बर्बाद योजनाएं
- करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान
- देश के विमानन क्षेत्र की साख पर गहरा धब्बा
- पर्यटन और व्यापार पर व्यापक असर
एयरपोर्ट्स पर जो नजारा दिख रहा है, वह किसी आपदा से कम नहीं है. यात्री रिफंड की मांग कर रहे हैं, वैकल्पिक उड़ानों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और कंपनी के अधिकारियों से जवाब मांग रहे हैं.
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