प्रदूषण संकट गहराया: दिल्ली में पुराने वाहनों पर कार्रवाई और EV मिशन तेज़ करने के निर्देश

दिल्ली में सर्दियों की दस्तक के साथ ही प्रदूषण का स्तर तेज़ी से बढ़ने लगा है। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 350 के पार पहुँचकर ‘बहुत ख़राब’ श्रेणी में दर्ज किया गया, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने ग्रैप (GRAP) का स्टेज-2 लागू कर दिया। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री कार्यालय में 24 अक्टूबर को एक हाई-लेवल बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने की और इसमें पर्यावरण, ऊर्जा, कृषि, आवास समेत कई मंत्रालयों के सचिवों के साथ दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव शामिल हुए।
बैठक में सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर जताई गई कि दिल्ली-NCR के कुल पंजीकृत वाहनों में से आधे से ज़्यादा सिर्फ दिल्ली में हैं। NCR में कुल 2.97 करोड़ वाहन रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 1.57 करोड़ दिल्ली में ही हैं—जबकि राजधानी NCR के कुल क्षेत्रफल का मात्र 2.7 प्रतिशत हिस्सा है। इसके साथ ही यह तथ्य भी सामने आया कि दिल्ली-NCR में 37 प्रतिशत वाहन अभी भी पुराने BS-I से BS-III उत्सर्जन मानकों वाले हैं, जो प्रदूषण फैलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
केंद्र ने बैठक में चारों पड़ोसी राज्यों—हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब—को स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए व्यावहारिक और असरदार कदम तुरंत उठाए जाएं, ताकि हवा की गुणवत्ता में जल्द सुधार दिख सके। बैठक के बाद भी राजधानी की हवा में सुधार नहीं आया और पराली जलाने तथा वाहनों के उत्सर्जन के कारण 11 से 13 नवंबर के बीच दिल्ली का AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुँच गया।
EV यानी इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की धीमी गति पर भी सरकार ने चिंता जताई। दिल्ली में अक्टूबर महीने में सिर्फ 4,419 इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन रजिस्टर्ड हुए, जबकि इसी अवधि में पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहन 78,114 की संख्या तक पहुँच गए। चारपहिया वाहनों में भी इलेक्ट्रिक विकल्पों को अपनाने की रफ्तार कम रही। अक्टूबर में केवल 2,331 इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारें रजिस्टर्ड हुईं और जनवरी से अक्टूबर तक यह संख्या 17,942 के आसपास रही, जो अपेक्षा से काफी कम है।
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए NCR के राज्यों को अपने ANPR यानी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम, RFID और ITMS जैसे तकनीकी सिस्टम को और सख़्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है, ताकि पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। सरकार का मानना है कि यदि वाहनों पर नियंत्रण और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के प्रयास तेज़ किए जाएं, तो आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।





