फैक्ट चेक: पत्नी के शव को बोरे में भरकर कंधे पर उठाते हुए व्यक्ति की यह तस्वीर वर्तमान की नहीं, जानें पूरा सच

फैक्ट चेक: पत्नी के शव को बोरे में भरकर कंधे पर उठाते हुए व्यक्ति की यह तस्वीर वर्तमान की नहीं, जानें पूरा सच
फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। इसमें एक व्यक्ति को एक महिला के शव को बोरे में भरते हुए और फिर कंधे पर उठाकर ले जाते हुए देखा जा सकता है।
पोस्ट के साथ दावा किया जा रहा है कि — “ओडिशा में एम्बुलेंस न मिलने के कारण एक मजबूर व्यक्ति ने अपनी पत्नी के शव को बोरे में डालकर बेटे के साथ कंधे पर उठाकर घर ले गया।” यह तस्वीर कई यूज़र्स ने यह लिखकर शेयर की — “कहां है सरकार? एम्बुलेंस न मिलने पर मजबूर पति ने शव को बोरे में भरकर उठाया।”

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।
फैक्ट चेक:
न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि वायरल तस्वीर हालिया दिनों की नहीं है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर की हमें देखने में पुरानी लगी इसलिए सत्यता जानने के लिये हमने गूगल पर पड़ताल की। सबसे पहले हमने वायरल वीडियो को गूगल कुछ संबंधित कीवर्ड्स के साथ सर्च किया। इस दौरान हमें वायरल तस्वीर से संबंधित पंजाब केसरी की वेबसाइट पर एक लेख मिला। जिसे अगस्त 2016 को छापा गया था।

लेख के मुताबिक वायरल तस्वीर वाला मामला अगस्त 2016 का है जो ओडिशा के कालाहांडी ज़िले में हुई थी। दरअसल, 80 वर्षीय सलमानी बेहरा की बालासोर सोरो रेलवे स्टेशन के पास मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई थी। मृत शरीर को सोरो कम्युनिटी हेल्थ सेंटर ले जाया गया और रेलवे पुलिस को भी इसकी सूचना दे दी गई थी। लेकिन वो 12 घंटे बाद अस्पताल पहुंचे। रेलवे पुलिस के सब इंस्पैक्टर प्रताप रूद्र मिश्रा ने बताया कि शरीर को पोस्टमार्टम के लिए बालासोर जिला अस्पताल ले जाना ज़रूरी था लेकिन अस्पताल में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी और ना ही काेई ऑटो वाला जाने काे तैयार था। जो तैयार थे वो 3500 रुपए मांग रहे थे, परंतु उन्हें इस काम के लिए सिर्फ 1000 रुपए खर्च करने का आदेश था।
इसके बाद मिश्रा ने कुछ मजदूरों को लाश को ढोकर ले जाने काे कहा। मजदूर लाश को एक बांस के डंडे में बांधकर ले जाना चाह रहे थे लेकिन देरी होने की वजह से लाश अकड़ गई और मजदूरों को लाश बांधने में परेशानी हो रही थी। इसलिए उन्होंने कूल्हे के पास से लाश को तोड़कर उसे पुरानी चादर में लपेटा और एक बांस से बांधकर उसे दो किलोमीटर दूर स्थित रेलवे स्टेशन ले गए। जहां से लाश को ट्रेन से ले जाया गया।
उपरोक्त रिपोर्ट में मिली जानकारी के आधार पर हमने गूगल पर बारीकी से खोजना शुरू किया। खोज के दौरान हमें वायरल तस्वीर जनसत्ता की वेबसाइट पर अगस्त 26, 2016 को छपे लेख में मिली। प्राप्त लेख में उपरोक्त लेख में दी गयी जानकारी की पुष्टि की गयी है।

पड़ताल के दौरान मिले तथ्यों से हमने जाना कि वायरल तस्वीर की घटना हालिया दिनों का नहीं बल्कि साल 2016 के दौरान की है, जिसे हालिया दिनों में भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है।





