विदेश

इज़राइल-गाज़ा संघर्ष रोकने की कोशिशें तेज़, बंदी विनिमय और संघर्षविराम पर बातचीत जारी

इज़राइल और गाज़ा के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के प्रयास बुधवार को तेज़ हो गए जब हमास ने संभावित कैदी-बंदी विनिमय समझौते के तहत इज़राइली बंधकों और फिलीस्तीनी कैदियों की सूचियों का आदान-प्रदान किया। यह घटनाक्रम मिस्र में हो रही गंभीर वार्ता की पृष्ठभूमि में सामने आया, जहां अमेरिका, इज़राइल, फिलीस्तीनी प्राधिकरण, क़तर और तुर्की के वरिष्ठ अधिकारी एक साथ बातचीत कर रहे हैं। राजनयिकों ने इसे अब तक का सबसे ठोस प्रयास बताया है जिससे लगभग दो वर्षों से गाज़ा में जारी हिंसा को रोका जा सके।

इन वार्ताओं में तीन प्रमुख मुद्दों पर फोकस किया जा रहा है: पहला, संघर्षविराम को लागू करने की प्रक्रिया; दूसरा, इज़राइली सेना की गाज़ा से चरणबद्ध वापसी; और तीसरा, बंधकों और कैदियों के आदान-प्रदान की शर्तें। यह बातचीत उस समय शुरू हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक 20 बिंदुओं वाली महत्वाकांक्षी शांति योजना पेश की, जिसमें युद्ध को समाप्त करने, बंदियों की रिहाई और गाज़ा से इज़राइली वापसी की रूपरेखा शामिल है।

ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और दामाद जेरेड कुशनर — जो 2020 में अब्राहम समझौते में अहम भूमिका निभा चुके हैं — भी इस बार बातचीत में सक्रिय रूप से शामिल हैं। इससे साफ है कि अमेरिका इस शांति प्रयास में सीधे तौर पर शामिल है। वार्ता में क्षेत्रीय ताकतें भी भूमिका निभा रही हैं। इज़राइल की ओर से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी और रणनीतिक मामलों के मंत्री रॉन डर्मर ने मिस्र में चल रही वार्ता में हिस्सा लिया। क़तर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी और तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहीम कालिन भी मौजूद रहे। दोनों नेता पहले से ही मध्यस्थता की भूमिका निभाते रहे हैं।

गाज़ा के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमलों के बाद शुरू हुई इज़राइली जवाबी कार्रवाई में अब तक 67,000 से अधिक फिलीस्तीनियों की मौत हो चुकी है। वहीं, हमास के शुरुआती हमले में 1,200 इज़राइली नागरिक मारे गए थे और 251 को बंधक बनाया गया था। अब पूरी दुनिया की निगाह इस पर टिकी है कि क्या ये नई वार्ताएं इस संघर्ष को रोक पाएंगी और गाज़ा में स्थायी शांति की राह खोलेंगी।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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