आईएसएस तक पहुंचे भारतीय शुभांशु शुक्ला बने ‘विकसित भारत बिल्डाथॉन’ के ब्रांड एंबेसडर

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) तक पहुंचने वाले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत बिल्डाथॉन’ कार्यक्रम का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया गया है। यह पहल देशभर के स्कूलों में नवाचार, वैज्ञानिक सोच और रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
‘विकसित भारत बिल्डाथॉन’ शिक्षा मंत्रालय और अटल इनोवेशन मिशन के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। यह अब तक का देश का सबसे बड़ा स्कूल हैकाथॉन है, जिसमें कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों की भागीदारी होगी। इस कार्यक्रम के तहत देशभर के लगभग 1.5 लाख स्कूलों के एक करोड़ से अधिक छात्र मिलकर नए विचार, डिजाइन और प्रोटोटाइप तैयार करेंगे।
चार प्रमुख थीम पर होगा काम
इस बिल्डाथॉन के लिए विद्यार्थियों को चार मुख्य विषयों पर प्रोजेक्ट तैयार करने होंगे—
1. आत्मनिर्भर भारत: स्वावलंबी तकनीक और समाधान विकसित करना
2. स्वदेशी: देशी विचारों और नवाचारों को बढ़ावा देना
3. वोकल फॉर लोकल: स्थानीय उत्पादों, कला और संसाधनों को प्रोत्साहन देना
4. समृद्धि: सतत विकास और आर्थिक समृद्धि के रास्ते बनाना
‘विकसित भारत बिल्डाथॉन’ का शुभारंभ 23 सितंबर को हुआ था। प्रतिभागियों के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 6 अक्तूबर तय की गई है, जबकि लाइव बिल्डाथॉन का आयोजन 13 अक्तूबर को किया जाएगा। विजेताओं की घोषणा दिसंबर में होगी। इस दौरान छात्र टीमें बनाकर अपने विचारों को वास्तविक रूप देने और समाज की समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करने का अवसर पाएंगी।
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला भारतीय वायुसेना के 39 वर्षीय अधिकारी और टेस्ट पायलट हैं। उन्होंने हाल ही में एक्सिओम-4 मिशन के तहत अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूरी की थी। यह मिशन इसरो, नासा और एक्सिओम स्पेस के सहयोग से संपन्न हुआ। इस यात्रा के साथ शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने वाले पहले भारतीय और राकेश शर्मा (1984) के बाद अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय बने।
शनिवार को शुभांशु शुक्ला ने स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच ‘विकसित भारत बिल्डाथॉन’ की रूपरेखा और उद्देश्यों पर विस्तृत चर्चा हुई। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस दृष्टि का हिस्सा है, जिसके तहत विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और सृजनशीलता की भावना विकसित कर उन्हें भविष्य के ‘विकसित भारत’ का निर्माता बनाया जा सके।





