क्या गूगल की बादशाहत अब खतरे में? AI चैटबॉट्स से बढ़ती चुनौती

टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ‘फ्यूचर एआई सेंटिमेंट वेव 3’ रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में 55% और ब्रिटेन में 62% लोग अब पारंपरिक सर्च इंजन की बजाय AI चैटबॉट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि गूगल जहां लिंक और विज्ञापनों की लंबी लिस्ट दिखाता है, वहीं AI चैटबॉट्स सीधे और सटीक जवाब देते हैं। यही कारण है कि यूजर्स का भरोसा अब जनरेटिव AI पर ज्यादा बढ़ रहा है।
AI के पॉपुलर होने का सबसे बड़ा कारण पर्सनलाइजेशन है। चैटबॉट्स बातचीत की तरह स्टेप-बाय-स्टेप समाधान देते हैं। इससे यूजर्स को न सिर्फ सही जानकारी मिलती है, बल्कि समय और मेहनत दोनों की बचत होती है। यही वजह है कि लोग अब यात्रा की योजना बनाने, फिटनेस रूटीन तैयार करने, गिफ्ट सजेशन पाने, लैपटॉप और मोबाइल की तकनीकी दिक्कतें दूर करने, प्रोडक्ट कंपैरिजन करने और ई-मेल या मैसेज ड्राफ्ट करने जैसे कामों में गूगल पर निर्भर रहने की बजाय AI टूल्स को तरजीह दे रहे हैं। पहले जहां इन कामों के लिए यूजर्स को गूगल पर अलग-अलग लिंक खंगालने पड़ते थे, वहीं अब एक ही चैटबॉट उनके लिए सारी जानकारी आसान भाषा में उपलब्ध करवा देता है।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि फैक्ट्स वेरिफाई करने और ऑथेंटिक सोर्स से जानकारी प्राप्त करने के लिए अभी भी सर्च इंजन जरूरी रहेंगे। लेकिन पहली पसंद के तौर पर AI चैटबॉट्स की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। ChatGPT जैसे टूल रोजाना अरबों प्रॉम्प्ट्स को हैंडल कर रहे हैं और यही बढ़ता हुआ ट्रेंड आने वाले समय में गूगल की बादशाहत के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।





