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आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली की ओर बड़ा कदम: भारत ने टेस्ट की ULPGM-V3 मिसाइल

भारत ने अपनी स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए यूएवी-लॉन्च्ड प्रिसिजन गाइडेड मिसाइल (ULPGM)-V3 का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले स्थित नेशनल ओपन एरिया रेंज (NOAR) में किया गया। इस बड़ी उपलब्धि की जानकारी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ, उद्योग जगत, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को इस सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाई पर ले जाता है और यह साबित करता है कि भारतीय उद्योग अब महत्वपूर्ण रक्षा तकनीकों को आत्मसात कर उत्पादन के लिए तैयार है।


इससे पहले मई माह में भी भारतीय सेना ने देश के विभिन्न क्षेत्रों—जैसे पोखरण, बबीना और जोशीमठ फील्ड फायरिंग रेंज—में अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के युद्धस्तरीय परीक्षण किए थे। 27 मई को थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने बबीना रेंज का दौरा कर परीक्षणों की समीक्षा की थी। इन परीक्षणों में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सिमुलेशन के माध्यम से हथियार प्रणालियों का गहन मूल्यांकन किया गया था।

यूएलपीजीएम-वी3 को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह आधुनिक तकनीकों से लैस एक अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से ड्रोन से लॉन्च करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह मिसाइल हवा से सतह पर मार करने में सक्षम है और ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक पर काम करती है। इसमें इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर और पैसिव होमिंग जैसी विशेषताएं हैं, जिससे यह दिन और रात दोनों समय में लक्ष्य को सटीकता से भेद सकती है।

12.5 किलोग्राम वजनी इस मिसाइल में ड्यूल थ्रस्ट सॉलिड प्रोपल्शन यूनिट लगी है। यह दिन के समय 4 किलोमीटर और रात में 2.5 किलोमीटर तक मार कर सकती है। इस परियोजना में अदाणी ग्रुप और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) प्रमुख विनिर्माण साझेदार हैं, जबकि डीआरडीओ इसका विकास और परीक्षण करता है। यह मिसाइल सिस्टम अपने पहले के वर्जन वी1 और वी2 की तुलना में तकनीकी रूप से कहीं अधिक उन्नत है।

यूएलपीजीएम-वी3 का यह परीक्षण भारत की आत्मनिर्भर रक्षा रणनीति के तहत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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