गाज़ा में इज़रायली बमबारी हुई और भी विनाशकारी, अल-मवासी समेत सुरक्षित क्षेत्रों को बनाया गया निशाना

गाज़ा पर इज़रायली हमले लगातार तेज़ होते जा रहे हैं, और इस बार की बमबारी अब तक की सबसे भीषण मानी जा रही है। इज़रायली प्रधानमंत्री ने हाल ही में घोषित सीज़फायर को तोड़ते हुए साफ कहा है कि युद्ध तब तक नहीं रुकेगा जब तक हमास का पूरी तरह से खात्मा नहीं हो जाता और बंधकों की रिहाई सुनिश्चित नहीं हो जाती।
इज़रायली सेना ने अब एक बार फिर गाज़ा पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जिससे फिलिस्तीनियों के लिए सुरक्षित जगहें लगभग समाप्त हो गई हैं। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को इज़रायल ने अल-मवासी क्षेत्र को निशाना बनाया — जो अब तक युद्ध से प्रभावित नागरिकों के लिए एकमात्र सुरक्षित ज़ोन माना जा रहा था। इस हमले में 50 से अधिक लोगों की जान गई है। अल-मवासी वही इलाका है, जहां इज़रायली बलों ने पहले ही लोगों को स्थान खाली करने का आदेश दिया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘एथनिक क्लींजिंग’ की दिशा में एक और कदम मान रहे हैं।
अल-मवासी दक्षिण गाज़ा में एक बड़ा निकासी क्षेत्र है, जहां बेहद सीमित संसाधनों के बीच हजारों विस्थापित लोग रह रहे हैं। राफा और खान यूनिस जैसे इलाकों से भागे लोग यहां शरण लेने पर मजबूर हुए हैं। 18 मार्च से युद्ध दोबारा शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र और अन्य शिविरों पर बमबारी लगातार जारी है। रिपोर्टों के अनुसार, सिर्फ बीते दो दिनों में ही 90 से अधिक लोग मारे गए हैं। UNRWA और अन्य राहत आश्रयों को भी निशाना बनाया गया है।
2 मार्च से इज़रायल ने गाज़ा में खाद्य सामग्री, ईंधन और मानवीय सहायता की आपूर्ति पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इससे हालात और भी भयावह हो गए हैं। ऑक्सफैम की नीति प्रमुख बुशरा खालिदी के मुताबिक, “बच्चे अब दिन में एक बार से भी कम खा पा रहे हैं और उन्हें हर अगले भोजन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।” उन्होंने चेतावनी दी है कि गाज़ा अब कुपोषण और अकाल की गंभीर स्थिति की ओर बढ़ रहा है।
गाज़ा में जारी यह संकट न केवल मानवीय त्रासदी बनता जा रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक चुनौतीपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है।





