म्यांमार में 7.7 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप: 2700 से अधिक की मौत, भारत ने भेजी राहत सामग्री

म्यांमार में 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने व्यापक तबाही मचाई है। भूकंप के बाद 6.4 तीव्रता के झटके भी महसूस किए गए, जिससे हालात और गंभीर हो गए। इस आपदा में अब तक 2,719 लोगों की मौत हो चुकी है, 4,521 घायल हुए हैं और 441 लोग अभी भी लापता हैं। देश के बुनियादी ढांचे, सड़कों और रिहायशी इलाकों को भारी नुकसान पहुंचा है।
म्यांमार में इस विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत त्वरित राहत मिशन शुरू किया। भारतीय नौसेना के आईएनएस सतपुड़ा और आईएनएस सावित्री ने 50 टन राहत सामग्री लेकर यांगून पहुंचाया है। इसके अलावा, आईएनएस करमुख, आईएनएस घड़ियाल और एलसीयू-52 भी 500 टन से अधिक राहत सामग्री लेकर रवाना हो चुके हैं। भारतीय वायुसेना का एक सी-130 विमान मंगलवार को 15 टन से अधिक राहत सामग्री लेकर मांडले पहुंचेगा।
29 मार्च को भारत ने पांच सैन्य विमानों से राहत सामग्री, बचाव दल और चिकित्सा उपकरण भेजे थे। भारतीय नौसेना के जहाजों पर एक आर्मी फील्ड अस्पताल और 118 चिकित्साकर्मी भी भेजे गए हैं, जो घायलों को चिकित्सा सहायता प्रदान कर रहे हैं।
भूकंप का केंद्र मांडले और सेगेंग शहरों की सीमा पर, जमीन के 10 किलोमीटर भीतर स्थित था। इस आपदा के कारण लगभग 35 लाख लोग बेघर हो चुके हैं। कई प्रभावित क्षेत्रों तक अभी भी राहत और बचाव दल नहीं पहुंच पाए हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। गर्मी के कारण शवों से दुर्गंध उठने लगी है, जिससे वातावरण दूषित हो रहा है और सांस लेना मुश्किल हो रहा है।
म्यांमार की सत्तारूढ़ जुंटा सरकार ने 6 अप्रैल तक राष्ट्रीय शोक घोषित किया है। देशभर में सरकारी ध्वज आधे झुके रहेंगे। अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ है, जिसके चलते सड़कों पर अस्थायी चिकित्सा केंद्र बनाए जा रहे हैं। स्थानीय लोग प्रशासन के साथ मिलकर मलबे में दबे लोगों को निकालने में मदद कर रहे हैं।
इस भूकंप के झटके न केवल म्यांमार बल्कि उसके पड़ोसी देशों में भी महसूस किए गए। थाईलैंड के बैंकॉक और चियांग मेई शहरों में भी इस आपदा से व्यापक नुकसान हुआ है। बैंकॉक में एक निर्माणाधीन गगनचुंबी इमारत गिरने से 76 लोग मलबे में दब गए, जिनकी तलाश जारी है। थाईलैंड में अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, लेकिन यह संख्या बढ़ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों और प्रशासन की मदद से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेजी से जारी है। भारत, जो इस संकट में सबसे पहले मदद के लिए आगे आया, लगातार चिकित्सा और मानवीय सहायता भेज रहा है। भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए अन्य देशों से भी मदद की अपील की गई है।





