महाकुंभ 2025: पीएम मोदी बोले – यह केवल कुंभ नहीं, युग परिवर्तन की आहट

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर 45 दिवसीय महाकुंभ का भव्य समापन हो गया। 13 जनवरी से शुरू हुए इस महापर्व में आस्था की अद्भुत लहर देखने को मिली, जहां 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। यह संख्या देश की लगभग आधी आबादी के बराबर है। इस दौरान 20 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कल्पवास किया, जबकि नेपाल, भूटान, अमेरिका, इंग्लैंड और जापान समेत कई देशों के भक्तों ने भी आस्था की डुबकी लगाई।
महाकुंभ के सफल आयोजन से अभिभूत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक पर्व पर एक ब्लॉग लिखा। उन्होंने इसे केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि “एकता का महायज्ञ” और “युग परिवर्तन की आहट” करार दिया। पीएम मोदी ने कहा कि जब कोई राष्ट्र अपनी गुलामी की मानसिकता को तोड़कर नवचैतन्य के साथ आगे बढ़ता है, तो ऐसा ही दृश्य उपस्थित होता है, जैसा प्रयागराज में देखने को मिला। प्रधानमंत्री ने इस आयोजन को 140 करोड़ भारतीयों की आस्था से जुड़ा बताते हुए कहा, “महाकुंभ में देवी-देवताओं, संत-महात्माओं, महिलाओं, युवाओं और वृद्धों की उपस्थिति से देश की जागृत चेतना का साक्षात्कार हुआ। यह समरसता और प्रेम का महापर्व था, जिसने सभी को एक धागे में पिरो दिया।”
पीएम मोदी ने अपने लेख में तीर्थराज प्रयाग के श्रृंगवेरपुर क्षेत्र का भी उल्लेख किया, जहां भगवान श्रीराम और निषादराज का ऐतिहासिक मिलन हुआ था। उन्होंने इसे “भक्ति और सद्भाव के संगम” की मिसाल बताते हुए कहा कि प्रयागराज का यह तीर्थ आज भी हमें एकता और समरसता की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आधुनिक युग में इस प्रकार के विराट आयोजन की कोई दूसरी मिसाल नहीं है। उन्होंने लिखा, “पूरी दुनिया हैरान है कि बिना औपचारिक निमंत्रण के करोड़ों श्रद्धालु एक नदी तट पर एकत्रित हुए और संगम में आस्था की डुबकी लगाई।” महाकुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालु संगम तट की ओर बढ़ते रहे, और यह भावनाओं का एक ऐसा ज्वार था, जो लगातार ऊंचा उठता रहा। पीएम मोदी ने इस आयोजन को मैनेजमेंट, प्लानिंग और पॉलिसी एक्सपर्ट्स के लिए अध्ययन का विषय करार दिया।
महाकुंभ संपन्न हुआ…एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ। प्रयागराज में एकता के महाकुंभ में पूरे 45 दिनों तक जिस प्रकार 140 करोड़ देशवासियों की आस्था एक साथ, एक समय में इस एक पर्व से आकर जुड़ी, वो अभिभूत करता है! महाकुंभ के पूर्ण होने पर जो विचार मन में आए, उन्हें मैंने कलमबद्ध करने का… pic.twitter.com/TgzdUuzuGI
— Narendra Modi (@narendramodi) February 27, 2025
प्रधानमंत्री ने महाकुंभ में युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने लिखा, “भारत के युवा इस आयोजन में बड़ी संख्या में पहुंचे, जो यह दर्शाता है कि वे अपनी संस्कृति और संस्कारों के प्रति सजग और समर्पित हैं। यह एक सकारात्मक संकेत है कि हमारी युवा पीढ़ी अपनी धरोहर को आगे ले जाने का दायित्व समझ रही है।” पीएम मोदी ने यह भी कहा कि जो श्रद्धालु प्रयागराज नहीं पहुंच सके, वे भी इस महाकुंभ से भावनात्मक रूप से जुड़े रहे। जब श्रद्धालु कुंभ से लौटे, तो उनके गांवों में उनका विशेष स्वागत हुआ। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि श्रद्धालु अपने साथ त्रिवेणी तीर्थ का पवित्र जल लेकर गए, जिसकी कुछ बूंदों ने भी करोड़ों भक्तों को कुंभ स्नान जैसा ही पुण्य प्रदान किया।
पीएम मोदी ने लिखा कि इस बार महाकुंभ में जितने श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद थी, उससे कहीं अधिक संख्या में लोग पहुंचे। प्रशासन ने पुराने कुंभों के अनुभवों के आधार पर अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक संख्या कहीं अधिक निकली। उन्होंने कहा, “इस महाकुंभ में अमेरिका की आबादी से दोगुने लोग पहुंचे। इससे स्पष्ट होता है कि भारत अपनी विरासत पर गर्व कर रहा है और एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।”
प्रधानमंत्री ने अपने ब्लॉग में महाकुंभ को केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारत के नवजागरण का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “इस महाकुंभ ने आने वाली कई शताब्दियों के लिए एक नींव रख दी है। यह भारत की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण की आहट है, जो देश को एक नए भविष्य की ओर ले जाएगी।” महाकुंभ के समापन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि वे सोमनाथ मंदिर के दर्शन के लिए जाएंगे और वहां हर भारतीय के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करेंगे।





