कौन हैं साध्वी भगवती सरस्वती? जो कैटरीना कैफ, ईशा अंबानी और रवीना टंडन के साथ आईं नजर

आस्था और आध्यात्मिकता का प्रतीक महाकुंभ मेले का समापन 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के मौके पर हुआ. 13 मार्च से शुरू इस महाकुंभ में 26 फरवरी तक करोड़ों श्रृद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई. इस दौरान लाखों संतों, आध्यात्मिक साधकों, मशहूर कलाकारों और राजनेताओं की उपस्थिती इस आस्था और आध्यात्मिकता का प्रतीक महाकुंभ मेले मेले की गवाह बनीं.
हाल ही में महाकुंभ में पवित्र डुबकी लगाने आई अभिनेत्रि कैटरीना कैफ, ईशा अंबानी और रवीना टंडन जैसे कई प्रमुख लोग चर्चा का विषय बनें क्योंकि इस दौरान उनके साथ एक साधवी नजर आईं, जो देखने में विदेशी लग रही थीं. जिसके बाद से यह सवाल उठने लगे कि आखिर यह महिला कौन हैं और पवित्र महाकुंभ मेले के दौरान कैटरीना कैफ के साथ क्या कर रही हैं? बता दें कि महिला का नाम साध्वी भगवती सरस्वती है और वह मूल रूप से अमेरिका की रहने वाली हैं.
प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में बीते करीब डेढ़ महीने से तमाम आध्यात्मिक का जमावड़ा रहा, जिनमें कई लोग चर्चा का विषय बनें. कई लोगों को लोकप्रियता मिली उनकी आस्था के लिए तो कई लोगों ने महाकुंभ में सनातन धर्म को अपनाया. ऐसा ही एक नाम है साध्वी भगवती सरस्वती. ह परमार्थ निकेतन आश्रम से जुड़ी हैं और महाकुंभ भी पहुंची थी. उनकी कहानी सनातन धर्म को मानने वालों को प्रेरित करती है तो वहीं दुनिया को भी संदेश देती है कि कैसे भारतीय जीवनशैली शांति, संतुलन और सादगी का प्रतीक है. यही कारण है कि दुनिया भर के लोग सनातन को समझना चाहते हैं और उसके मूल्यों को अपनाना चाहते हैं.
साध्वी भगवती सरस्वती की दिलचस्प कहानी
अमेरिका में पैदा हुईं साध्वी भगवती सरस्वती का ताल्लुक यहूदी परिवार से था. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट करने वालीं साध्वी सरस्वती 1996 में भारत आई थीं और फिर यहीं की हो गईं. उन्होंने अपनी पुस्तक हॉलीवुड टू हिमालयाज में बताया है कि कैसे उन्हें बचपन में यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और खाने तक की व्यवस्था खराब थी. उनकी शादी भी हो गई थी, लेकिन वह पति से तलाक लेकर आध्यात्म और सत्य की खोज में भारत आ गईं. अब वह हिंदू जीवन पद्धति को अपना चुकी हैं. उन्होंने स्वामी चिदानंद सरस्वती से दीक्षा ली है और फिलहा परमार्थ निकेतन आश्रम की वह सदस्य हैं.
लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया से आने वाली साध्वी भगवती सरस्वती जब पहली बार भारत आईं तो उन्हें हिंदू धर्म के बारे में कुछ भी नहीं पता था. हालाँकि, गंगा नदी के तट पर एक गहन आध्यात्मिक अनुभव के बाद उनका जीवन बदल गया. इस महत्वपूर्ण क्षण ने उन्हें अपने पति को तलाक देने और भारत में बसने के लिए प्रेरित किया, जहाँ वह एक हिंदू संन्यासी बन गईं.
बीते 25 सालों से साध्वी भगवती सरस्वती आध्यात्मिक सेवा, ज्ञान शिक्षण, पवित्र कर्म और गहन आध्यात्मिक अभ्यास के लिए समर्पित हैं. साध्वीजी अपना ज्यादा समय ऋषिकेश में ही बिताती हैं. वह दिव्य शक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष के रूप में कार्य करती हैं। दिव्य शक्ति फाउंडेशन एक ऐसा संगठन है जो निःशुल्क विद्यालय, व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करता है.
इसके अलावा साध्वी भगवती सरस्वती परमार्थ निकेतन आश्रम में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक भी हैं. अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव एक ऐसा आयोजन है जो दुनिया भर के लोगों को योग और आध्यात्म के प्रति जागरूक करता है। साध्वी भगवती सरस्वती ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस की महासचिव भी हैं, जो स्वच्छ जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए समर्पित एक अंतरराष्ट्रीय अंतरधार्मिक संगठन है.





