राजनीति

दिल्ली चुनाव से पहले केजरीवाल ने EVM पर उठाए सवाल, 10% वोटों में गड़बड़ी की जताई आशंका

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मतदान से ठीक पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में गड़बड़ी की आशंका जताई है। उन्होंने दावा किया है कि उनके सूत्रों से जानकारी मिली है कि 10% वोटों में हेरफेर की जा सकती है।

 

चुनाव प्रचार के आखिरी दिन एक वीडियो संदेश जारी करते हुए केजरीवाल ने कहा, “जहां भी मैं जाता हूं, लोग मुझसे कहते हैं कि वे वोट तो AAP को देते हैं, लेकिन यह पता नहीं चलता कि उनका वोट जाता कहां है। हमें बताया गया है कि मशीनों में 10% तक गड़बड़ी की जा सकती है।”

 

उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि इतनी बड़ी संख्या में वोट डालें कि गड़बड़ी का असर खत्म हो जाए। उन्होंने कहा, “हमें कम से कम 15% की लीड लेनी होगी ताकि किसी भी संभावित हेरफेर के बावजूद जीत सुनिश्चित हो सके।” केजरीवाल ने बताया कि AAP ने एक विशेष वेबसाइट तैयार की है, जहां मतदान के दिन हर पोलिंग बूथ से छह अलग-अलग प्रकार के डेटा अपलोड किए जाएंगे। इसमें कुल मतदान संख्या, मशीन की बैटरी स्थिति और अन्य अहम जानकारियां शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

 

AAP प्रमुख ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) चुनाव में धांधली की कोशिश कर सकती है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में मतदान करें ताकि संभावित गड़बड़ी का मुकाबला किया जा सके।

 

गौरतलब है कि कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल पहले भी EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे पर अब तक संयम बरता था। यह पहली बार है जब केजरीवाल ने सार्वजनिक रूप से EVM में गड़बड़ी की संभावना का दावा किया है।

Show More

न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

"न्यूज़ मोबाइल हिंदी" एक डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है जो पाठकों को ताज़ा ख़बरें, गहन विश्लेषण और अपडेट सरल हिंदी में उपलब्ध कराता है। यह राजनीति, खेल, तकनीक, मनोरंजन और बिज़नेस जैसे विषयों पर समाचार प्रस्तुत करता है। साथ ही, इसमें फ़ैक्ट चेक (Fact Check) सेक्शन भी है, जिसके ज़रिए झूठी या भ्रामक ख़बरों की सच्चाई सामने लाकर पाठकों को विश्वसनीय और सही जानकारी दी जाती है। इसका मक़सद है—समाचारों के बीच तथ्य और अफ़वाह में स्पष्ट अंतर दिखाना।
Back to top button