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बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का आरोप, ‘टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने मुझे कहा बिहारी गुंडा’

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भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बुधवार को ट्वीट कर आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने उन्हें “बिहारी गुंडा” कहा। निशिकांत दुबे का दावा है कि संसद की आईटी समिति की मीटिंग में सांसद महुआ मोइत्रा ने उन्हें तीन बार बिहारी गुंडा कहकर अपमानित किया। इतना ही नहीं, निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर से भी इस मामले की शिकायत की है।

ऐसे शब्द का इस्तेमाल पहले कभी नहीं हुआ: दुबे।

इधर झारखंड के गोड्डा से लोकसभा सदस्य निशिकांत दुबे ने सदन के शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए कहा, ‘संसद सदस्य के रूप में यह मेरा 13वां वर्ष है, लेकिन कल जिस तरह से संसदीय समिति की बैठक में तृणमूल कांग्रेस की सदस्य ने उनके लिए बिहारी के साथ अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया, ऐसा इससे पहले कभी नहीं हुआ।’

टीएमसी को हिंदी भाषी लोगों से एलर्जी।

दुबे ने टीएमसी नेताओं पर हिंदी बोलने वालों से खुन्नस खाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टीएमसी को सभी हिंदी भाषी लोगों से एलर्जी है, इसलिए उन्होंने मुझे ‘बिहारी गुंडा’ कहा। यह बिहार के स्वाभिमान पर हमला है। मैंने सभी तथ्य अध्यक्ष को सौंप दिए हैं। उन्हें (महुआ मोइत्रा) माफी मांगनी चाहिए।

महुआ मोहित्रा ने सिर्फ मुझे ही नहीं अपितु समस्त हिंदी भाषियों को, समस्त महापुरुषों को गाली दी – दुबे।

टीएमसी सांसद ने आरोपों को किया खारिज।

उधर, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बीजेपी सांसद की तरफ से लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया। महुआ ने ट्वीट कर कहा, ‘समिति की बैठक कोरम पूरा नहीं होने के कारण हुई ही नहीं थी। मैं किसी को गाली कैसे दे सकती हूं जो बैठक में मौजूद ही नहीं थे। अटेंडेंस शीट देख लीजिए।’

मंगलवार को हुई थी सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति की बैठक।

बता दे कि मंगलवार को सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति की बैठक हुई थी। इसमें शामिल बीजेपी सांसद बैठक शुरू होने से पहले ही बाहर चले गए थे। उनका दावा था कि इस बैठक के एजेंडे (जासूसी कांड के मुद्दे) के बारे में उन्हें सूचित नहीं किया गया था। बीजेपी सांसदों का कहना था कि जब विपक्ष के हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही नहीं चल पा रही है तो फिर संसदीय समिति कैसे अपना काम कर सकती है।

इधर बीजेपी सदस्यों ने जब उपस्थिति रजिस्टर यानी अटेंडेंस शीट में हस्ताक्षर करने से मना कर दिया तो समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने कोरम की कमी के नियम का हवाला देते हुए बैठक स्थगित करने का एलान कर दिया था। गौरतलब है कि संसदीय समिति में अध्यक्ष को मिलाकर सदस्यों की कुल संख्या 31 होती है जबकि बैठक के लिए कम से कम 11 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होती है। बैठक स्थगित होने के बाद समिति के सदस्य और कांग्रेस सांसद कार्ति चिदम्बरम ने ट्वीट कर दावा किया कि बैठक में बुलाए गए आईटी मंत्रालय और गृह मंत्रालय के अधिकारी भी नहीं पहुंचे।

इसी बैठक के बाद बीजेपी के सांसद निशिकांत दुबे ने समिति की सदस्य और तृणमूल कांग्रेस की सांसद मोहुआ मोइत्रा पर यह सारे सनसनीखेज आरोप जड़ दिए और इस मुद्दे को लेकर गहमा- गहमी शुरू हो गई।

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