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फैक्ट चेक: क्या ताजमहल समेत 100 ऐतिहासिक इमारतों को लीज पर दे रही है मोदी सरकार? जानें सच्चाई

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सोशल मीडिया पर एक पोस्ट इन दिनों इस दावे के साथ वायरल हो रहा है कि केंद्र सरकार की ओर से 25 हजार करोड़ कमाने के लिए ताजमहल सहित 100 ऐतिहासिक स्थलों को लीज पर दिया जाएगा।

सोशल मीडिया पर एक यूज़र ने इस पोस्ट को साझा करते हुए लिखा – ‘मैं देश नहीं बिकने दूंगा’ का नारा लगाने वाले लोग आज देश का सब कुछ बेचने और लीज पर देने को आमादा हैं। यह बड़े शर्म की बात है।

इस तरह के पोस्ट आप यहाँ, यहाँ, यहाँ, यहाँ, यहाँ और यहाँ देख सकते है।

फैक्ट चेक :

न्यूज़मोबाइल ने इस पोस्ट की जांच कि और इसे भ्रामक पाया।

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सबसे पहले हम सच जानने के लिए पर्यटन मंत्रालय यानी (Ministry of Tourism) की आधिकारिक वेबसाइट पर गए। यहाँ हमे ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ योजना (Adopt A Heritage) के बारे में पता चला। दरअसल ये योजना – अडॉप्ट ए हेरिटेज: अपनी धारोहर, अपनी पहचान’ 27 सितंबर 2017 को शुरू की गई थी जिसे पर्यटन दिवस के मौके पर ही राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शुरू किया था। इसके तहत ऐतिहासिक इमारतों के रखरखाव के लिए ‘मोनुमेंट्स मित्र’ (Monument Mitra) चुने जाते हैं।

क्या है इस योजना का मकसद ?

आगे इस योजना के बारे में पड़ने पर हमे पता चला कि Adopt A Heritage – एक धरोहर को गोद लें- अपनी धरोहर अपनी पहचान’ पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एवं भारत तथा राज्य/संघ शासित सरकारों द्वारा एक सहयोगात्मक प्रयास है जिसके तहत सुविधाओं के विकास, परिचालन एवं रख-रखाव करने एवं बेहतर बनाने की जिम्मेदारी उठाने के लिए सार्वजनिक/निजी क्षेत्र कंपनियों एवं कॉरपोरेट नागरिकों/एनजीओ आदि को प्रोत्साहित करना है।

पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक अभी 76 साइटों के मेंटेनेस के लिए 24 एजेंसियों को आशय पत्र जारी कर दिए गए हैं। इस योजना के दायरे में 36 वर्ल्ड हेरिटेज साइट समेत 3686 प्राचीन स्मारक शामिल हैं। प्राइवेट कंपनियां इन स्थलों को टूरिस्ट फ्रेंडली बनाएंगी।

यही जानकारी हमे कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी मिली जिसे आप यहाँ और यहाँ देख सकते है।

ये सुविधाएं डेवलप होंगी।

– कैंपस को जगमग करना, स्मारकों में नाइट विजिट के इंतजाम करना।
– सीसीटीवी कैमरों से निगरानी का प्रबंध।
– फेसिलिटी व इंटरप्रेटेशन सेंटर, शॉपिंग, सॉवेनियर शॉप, क्लॉकरुम की सुविधाएं मुहैया कराना।
– लाइट एंड साउंड शो
– बैटरी ऑपरेटेड वाहन
– स्मारक की क्षमता के हिसाब से टूरिस्ट फ्लो मैनेजमेंट

पहले चरण में 14 हेरिटेज।

– इनमें प्रमुखतौर पर दिल्ली की कुतुब मीनार, पुराना किला, अग्रसेन की बावली, उत्तराखंड में गंगोत्री मंदिर, गोमुख तक का ट्रैक, ओडिशा में कोणार्क सूर्य मंदिर, कर्नाटक का हम्पी, और महाराष्ट्र में अजंता-एलोरा की गुफाएं और लद्दाख का लेह पैलेस शामिल है।

दूसरे चरण में 39 धरोहरें ।

– इनमें दिल्ली का लालकिला,आगरा में ताजमहल से लालकिले तक का कॉरिडोर, तेलंगाना में गोलकुंडा फोर्ट और असम का काजीरंगा पार्क शामिल।
– तीसरे चरण में 24 विरासत स्थल सौंपे जाएंगे।

यही सारी जानकारी हमे पर्यटन मंत्रालय यानी (Ministry of Tourism) की आधिकारिक वेबसाइट पर मिली एक पीडीऍफ़ में भी मिली है।

बता दे इस योजना के तहत देश के कुछ धरोहरों को 3 केटेगरी में बांटा गया है। जिसे आप यहाँ देख सकते है।

आगे और जांच करने पर हमे पता चला कि सरकार ने हाल ही में यानी 2020 में “एडॉप्ट ए हेरिटेज” परियोजना के तहत देश के धरोहर स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं के विकास एवं रखरखाव में मदद के लिये निजी क्षेत्र के साथ 26 समझौता ज्ञापन: एमओयू: पर हस्ताक्षर किये हैं । इनमें दिल्ली के लाल किला सहित कुतुब मिनार, जंतर मंतर, अब्दुल रहीम खान ए खाना धरोहर स्थल और दिल्ली का गोल गुंबद जैसे स्थल शामिल है।

ऐसी कुछ मीडिया रिपोर्ट्स आप यहाँ और यहाँ देख सकते है।

इन रिपोर्ट्स में ये भी लिखा है कि किस प्राइवेट कंपनी का किस धरोहर के लिए केंद्र सरकार के साथ समझौता हुआ है।

आगे और जांच करने पर हमे अमर उजाला की एक न्यूज़ रिपोर्ट मिली जिसमे 2018 में भी तब के पर्यटन मंत्री ने 25 करोड़ रुपये में लाल किला समेत कई पर्यटन स्थलों को डालमिया भारत समूह के पास गिरवी रखने के दावों को खारिज किया था।

फिर हमे भारत सरकार की नोडल एजेंसी प्रेस इनफार्मेशन ब्यूरो (PIB) का भी एक ट्वीट मिला जिसमे उन्होंने दावा किया है कि संस्कृति मंत्रालय ने ऐसी किसी भी खबर की पुष्टि नहीं की है। मंत्रालय के मुताबिक विरासत स्थलों को लीज पर देने का ऐसा कोई भी फैसला सरकार की ओर से नहीं लिया गया है। ऐसे में सोशल मीडिया पर फैलाई गई ताजमहल सहित 100 विरासत स्थलों को लीज पर देने की खबर पूरी तरह से फेक है।

इतनी जानकारी से हम दावा कर सकते है कि सोशल मीडिया पर 100 ऐतिहासिक स्थलों को लीज पर देने वाली खबर गलत हैं।

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