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पीएम मोदी का राष्ट्र को संबोधन, महिला आरक्षण बिल पर जताया दुख

नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वां संशोधन) बिल के पास न होने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। अपने भाषण में उन्होंने कांग्रेस, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि यह बिल पास नहीं हो सका। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश को रोक दिया और इसकी हार का जश्न भी मनाया।

“महिलाएं नहीं भूलेंगी”

पीएम मोदी ने कहा कि महिलाएं इस बात को कभी नहीं भूलेंगी कि किन दलों ने इस बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब लोग अपने क्षेत्रों में नेताओं से मिलेंगे, तो उन्हें इसका जवाब भी देंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि यह बिल 2029 से पहले महिलाओं को उनका हक देने की दिशा में एक बड़ा कदम था, जिसका इंतजार पिछले 40 सालों से किया जा रहा था।

कांग्रेस पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को “एंटी-रिफॉर्म” पार्टी बताते हुए कहा कि उसने पहले भी कई अहम योजनाओं और फैसलों का विरोध किया है। इनमें जन धन योजना, आधार, डिजिटल पेमेंट, जीएसटी, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) आरक्षण, अनुच्छेद 370 हटाने और तीन तलाक कानून जैसे फैसले शामिल हैं।

DMK और TMC पर भी टिप्पणी

पीएम मोदी ने कहा कि डीएमके और टीएमसी के पास अपने-अपने राज्यों के लोगों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने का मौका था, लेकिन उन्होंने इसका फायदा नहीं उठाया।

“परिवारवादी दल डरते हैं”

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ दल इस बिल का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि अगर महिलाओं को ज्यादा मौका मिला तो उनकी परिवारवादी राजनीति को नुकसान होगा।

परिसीमन पर आरोप-प्रत्यारोप

पीएम मोदी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे परिसीमन को लेकर गलत जानकारी फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने साफ किया है कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा और सभी राज्यों की सीटें बराबर अनुपात में बढ़ाई जाएंगी।

बिल क्यों नहीं पास हुआ

संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। इसे पास होने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी।

महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो गया है। जहां सरकार इसे महिलाओं के अधिकार से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बता रहा है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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