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सामान्य वैवाहिक कलह को नहीं माना जा सकता आत्महत्या की वजह: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति-पत्नी के बीच होने वाले सामान्य विवाद, भावनात्मक तनाव या कुछ समय तक बातचीत न होना अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment to Suicide) का अपराध नहीं माना जा सकता।

न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या से जुड़े एक मामले में पति और उसके परिवार के सदस्यों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप तभी साबित हो सकता है, जब यह स्पष्ट रूप से दिखाया जाए कि आरोपी के व्यवहार ने सीधे या परोक्ष रूप से पीड़ित को यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया हो।

मामला एक महिला की आत्महत्या से जुड़ा था, जिसने अपने मायके में जान दे दी थी। रिकॉर्ड के अनुसार, पति नौकरी के सिलसिले में मस्कट गया था। वीजा संबंधी समस्याओं के कारण पत्नी उसके साथ नहीं जा सकी थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था और करीब दो सप्ताह तक उनकी बातचीत नहीं हुई थी।

महिला की मौत के बाद उसके परिवार ने पति और उसके रिश्तेदारों पर दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया। परिवार का कहना था कि शादी में पर्याप्त उपहार दिए जाने के बावजूद अतिरिक्त धन की मांग की जा रही थी। इन आरोपों के आधार पर निचली अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी। बाद में हाई कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अदालतों के फैसलों को पलटते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन में होने वाले सामान्य मतभेद, भावनात्मक दूरी या कुछ समय तक संवाद न होना क्रूरता या आत्महत्या के लिए उकसाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष को आरोपी के व्यवहार और आत्महत्या के बीच स्पष्ट तथा प्रत्यक्ष संबंध साबित करना होगा। केवल रिश्तों में तनाव या मतभेद के आधार पर आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता।

पीठ ने पाया कि इस मामले में ऐसा कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं था, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों के व्यवहार ने महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर किया था। इसी आधार पर अदालत ने दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़े आरोपों को कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं माना और सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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