नए स्लैब, आसान नियम! संसद में पास हुआ इनकम टैक्स (नंबर-2) बिल 2025

लोकसभा ने सोमवार को इनकम टैक्स (नंबर-2) बिल 2025 पारित कर दिया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संशोधित बिल सदन में पेश किया, जिसमें संसदीय सिलेक्ट कमेटी की लगभग सभी सिफारिशें शामिल की गईं। बिल के पारित होते ही सदन की कार्यवाही दिन के लिए स्थगित कर दी गई। इस नए कानून में कमेटी की 285 सिफारिशें जोड़ी गई हैं, जिनका उद्देश्य भारत की जटिल इनकम टैक्स व्यवस्था को आसान बनाना, प्रक्रियाओं को सरल करना और कानूनी विवादों को कम करना है। इससे पहले, इस साल 13 फरवरी को पेश किए गए पुराने बिल को ड्राफ्टिंग गलतियों और अस्पष्ट प्रावधानों की वजह से वापस ले लिया गया था।
संशोधित बिल में टैक्स स्लैब और दरों में बदलाव किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी, उनकी जेब में ज्यादा पैसा बचेगा और खपत, बचत व निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसएमई) की परिभाषा को एमएसएमई एक्ट के अनुसार बनाने, गैर-लाभकारी संगठनों के लिए ‘आय’ और ‘रसीद’ जैसे शब्दों की स्पष्ट परिभाषा देने, अनाम दान के नियम तय करने और ‘डिम्ड एप्लीकेशन’ प्रावधान हटाने जैसे बदलाव भी किए गए हैं, ताकि कानूनी विवादों से बचा जा सके।
बिल में एडवांस रूलिंग फीस, प्रोविडेंट फंड पर टीडीएस, लो-टैक्स सर्टिफिकेट और पेनल्टी से जुड़े प्रावधानों में भी पारदर्शिता लाने के लिए संशोधन किए गए हैं। नया कानून 1961 के इनकम टैक्स एक्ट की जगह लेगा, जिसमें पिछले दशकों में 4,000 से ज्यादा संशोधन हो चुके हैं और जो अब पांच लाख से ज्यादा शब्दों का हो गया है।
कमेटी के सदस्यों का कहना है कि इतनी जटिल भाषा के कारण आम करदाताओं के लिए अपने अधिकार और जिम्मेदारियां समझना मुश्किल हो गया था। बीजेपी सांसद और कमेटी सदस्य बैजयंत पांडा ने बताया कि नए कानून में टेक्स्ट को करीब 50% कम कर दिया गया है, जिससे आम लोग और एमएसएमई सेक्टर आसानी से इसे समझ पाएंगे।





