
हाल ही में, नेपाल ने भारत के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने की इच्छा व्यक्त की है। नई दिल्ली की यात्रा के दौरान, नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने जोर देकर कहा कि यदि दोनों पक्ष ‘खुले दिल’ से चर्चा करें, तो किसी भी समस्या का समाधान संभव है।
आर्थिक साझेदारी पर ध्यान
खनल ने कहा कि नेपाल की नई सरकार भारत के साथ संबंधों को एक ऐसे ‘मुतुअली बेनिफिशियल’ (आपसी लाभकारी) साझेदारी के रूप में देखती है, जो आर्थिक विकास और समृद्धि पर केंद्रित हो। उन्होंने भारत को एक तेजी से उभरती हुई तकनीकी और आर्थिक महाशक्ति के रूप में सराहा और ‘राइजिंग इंडिया’ के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई।
विवादित क्षेत्रों का मुद्दा
सीमा विवाद के मुख्य केंद्र कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा हैं। नेपाल का तर्क है कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार ये क्षेत्र उसके अंतर्गत आते हैं। नेपाल का मानना है कि इन क्षेत्रों से संबंधित कोई भी समझौता उनकी सहमति के बिना नहीं होना चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और रुख
यह विवाद 2020 में तब और गहरा गया जब नेपाल ने एक नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया, जिसमें इन क्षेत्रों को अपना बताया। भारत ने इस कदम को ‘एकतरफा और अनुचित’ बताते हुए स्पष्ट किया कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद से ही भारत इनका प्रशासन संभाल रहा है।
दोनों देशों ने इस मुद्दे को बातचीत के जरिए हल करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है, जो दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए एक सकारात्मक संकेत है।





