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National Technology Day: सीएम योगी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की दो मेगा रक्षा परियोजनाओं की शुरुआत

भारत की रक्षा ताकत और आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाई देने वाले दो अहम प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन शनिवार को लखनऊ में हुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिजिटल माध्यम से दिल्ली से इस समारोह में हिस्सा लिया, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से ब्रह्मोस एयरोस्पेस की इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी और टाइटेनियम एंड सुपर एलॉय मैटेरियल्स प्लांट का उद्घाटन किया।

लखनऊ के डिफेंस कॉरिडोर में स्थापित यह टाइटेनियम प्लांट एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों के लिए अत्याधुनिक सामग्रियां तैयार करेगा, जिनका उपयोग चंद्रयान जैसे अंतरिक्ष अभियानों और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में किया जाएगा। इसके साथ ही ब्रह्मोस मिसाइलों की टेस्टिंग और इंटीग्रेशन की सुविधाएं भी अब यहीं मिलेंगी, जो भारत की सामरिक क्षमताओं को और मजबूत बनाएंगी।

लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी के उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “…आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस है। 1998 में इसी दिन अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हमारे वैज्ञानिकों ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था और दुनिया को भारत की ताकत दिखाई थी। वह परीक्षण हमारे वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, रक्षा कर्मियों और कई अन्य हितधारकों के अथक प्रयासों का परिणाम था…”


इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में आपने ब्रह्मोस की ताकत देखी होगी। अगर नहीं देखी तो पाकिस्तान से पूछिए। आतंकवाद को उसी की भाषा में जवाब देना होगा। अब आतंक की हर कार्रवाई को युद्ध की तरह लिया जाएगा।”


ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस का संयुक्त प्रोजेक्ट है, जिसकी मारक क्षमता 290 से 400 किलोमीटर तक है और यह मैक 2.8 की स्पीड से चलती है। यह जमीन, समुद्र और हवा — तीनों से लॉन्च की जा सकती है और ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक पर आधारित है, जिससे यह दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक निशाना लगाती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारा लक्ष्य उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाना है। डिफेंस कॉरिडोर में अब तक 4,000 करोड़ रुपये का निवेश हो चुका है। आने वाले समय में लखनऊ को टेक्नोलॉजी और विकास के संगम के रूप में जाना जाएगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।”

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक फैक्ट्री का उद्घाटन नहीं है, बल्कि भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। जैसा डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था – दुनिया ताकतवरों का सम्मान करती है, कमजोरों का नहीं।”


इस कार्यक्रम को भारत की रणनीतिक क्षमता, टेक्नोलॉजी और आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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