ईरान के तेल कारोबार पर अमेरिका का बड़ा प्रहार, वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल

अमेरिका ने ईरान के तेल व्यापार को बड़ा झटका देते हुए चीन की एक बड़ी रिफाइनरी और करीब 40 शिपिंग कंपनियों व जहाजों पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। इन पर आरोप है कि ये ईरान के तेल को दुनिया भर के बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर रहे थे। यह कदम United States की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह ईरान के साथ व्यापार करने वाली कंपनियों और देशों पर भी “सेकेंडरी सैंक्शन” लगाने की चेतावनी दे रहा है। इसका मकसद ईरान की सबसे बड़ी आय—तेल निर्यात—को रोकना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की हेंगली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी पर भी कार्रवाई की गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का कहना है कि इस कंपनी ने 2023 से ईरान से कच्चा तेल लिया है, जिससे ईरानी सैन्य तंत्र को करोड़ों डॉलर की कमाई हुई है।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका उन सभी नेटवर्क पर कार्रवाई जारी रखेगा जो ईरान के तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद करते हैं। अमेरिका ने हाल ही में चीन, हांगकांग, यूएई और ओमान के वित्तीय संस्थानों को भी चेतावनी दी थी कि यदि वे ईरान से जुड़ा कारोबार जारी रखते हैं, तो उन पर भी सख्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
वहीं, इस फैसले को लेकर चीन की ओर से प्रतिक्रिया भी आई है। वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता Liu Pengyu ने कहा कि ऐसे प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों को नुकसान पहुंचाते हैं और कंपनियों के वैध अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही तनाव में है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और तेल आपूर्ति में बाधा के कारण कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
अमेरिका ने कुछ देशों को अस्थायी राहत भी दी है ताकि बाजार में अचानक तेल की कमी से बड़ा संकट न पैदा हो।




