मेस्सी के भारत दौरे पर बड़ा विवाद: कोलकाता में उग्र फैंस ने मचाया तांडव, सीएम ने मांगी माफी

कोलकाता, 9 दिसंबर 2025 – फुटबॉल के महानायक लियोनल मेस्सी की भारत यात्रा का पहला ही दिन एक बड़े विवाद और हिंसक घटनाक्रम में तब्दील हो गया. कोलकाता के प्रसिद्ध साल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित ‘GOAT इंडिया टूर 2025’ के उद्घाटन कार्यक्रम में भयंकर अफरातफरी मच गई, जब निराश और क्रोधित प्रशंसकों ने हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिया. यह घटना अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर मुद्दा बन गई है.
स्टेडियम में मची भगदड़ और हिंसा
हजारों उत्साही प्रशंसक 4 हजार रुपये से लेकर 12 हजार रुपये तक के महंगे टिकट खरीदकर अपने प्रिय फुटबॉल आइकन की एक झलक पाने के लिए स्टेडियम पहुंचे थे. लेकिन जब अर्जेंटीना के इस दिग्गज खिलाड़ी ने महज 10 से 15 मिनट के लिए स्टेडियम में प्रवेश किया और तुरंत बाद वहां से चले गए, तो प्रशंसकों का आक्रोश फूट पड़ा.
मेस्सी के अचानक चले जाने के बाद स्टेडियम में मौजूद भीड़ पूरी तरह बेकाबू हो गई. क्रोधित दर्शकों ने बोतलें फेंकना शुरू कर दिया, स्टेडियम में लगी कुर्सियों को तोड़-फोड़ डाला, सुरक्षा बैरिकेड्स को ध्वस्त करते हुए मैदान में घुस गए और आयोजकों के विरुद्ध जोरदार नारेबाजी करने लगे. पूरा कार्यक्रम एक हिंसक और अराजक दृश्य में बदल गया.
सीएम ममता बनर्जी ने जताई गहरी नाराजगी
इस शर्मनाक घटना पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के माध्यम से पूरे प्रकरण को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना की है.
“यह शर्मनाक है” – ममता बनर्जी
मुख्यमंत्री बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि वह स्वयं हजारों खेल प्रेमियों और फुटबॉल के दीवानों के साथ साल्ट लेक स्टेडियम में होने वाले इस भव्य आयोजन में शरीक होने वाली थीं. सभी अपने चहेते फुटबॉल स्टार लियोनल मेस्सी को देखने के लिए बेहद उत्साहित थे.

लेकिन कार्यक्रम के दौरान जो भयानक कुप्रबंधन और अव्यवस्था देखने को मिली, उससे वह गहरे आघात और निराशा में हैं. मुख्यमंत्री ने लियोनल मेस्सी, सभी खेल प्रेमियों और उनके प्रशंसकों से हृदय से क्षमा मांगते हुए कहा कि यह घटना राज्य सरकार और आयोजन से जुड़े सभी पक्षों के लिए अत्यंत शर्मसार करने वाली है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी परिस्थितियां भविष्य में कभी नहीं दोहराई जानी चाहिए.
उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन





