
पानी जीवन का आधार है, लेकिन भारत के कई हिस्सों में यही सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ती आबादी, भूजल का अत्यधिक दोहन, अनियमित मानसून, तेजी से बढ़ता शहरीकरण और जल संरक्षण की कमी ने देश के कई राज्यों को जल संकट की स्थिति में पहुंचा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पानी के संरक्षण और प्रबंधन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में यह संकट और गंभीर हो सकता है।
भारत में जल संकट कितना बड़ा है?
भारत दुनिया की लगभग 18% आबादी का घर है, लेकिन उसके पास दुनिया के कुल लगभग 4% मीठे जल संसाधन ही हैं। यही कारण है कि पानी की उपलब्धता और मांग के बीच का अंतर लगातार बढ़ रहा है।
सरकारी आकलनों के अनुसार, देश के कई हिस्सों में भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है। 2025 के आकलन में देश में वार्षिक भूजल पुनर्भरण (Recharge) 448.52 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) और उपयोग योग्य भूजल 407.75 BCM आंका गया, जबकि कुल वार्षिक भूजल दोहन 247.22 BCM रहा।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा जल संकट?
राजस्थान
कम वर्षा, रेगिस्तानी भूभाग और सीमित सतही जल स्रोतों के कारण राजस्थान लंबे समय से जल संकट का सामना कर रहा है। यहां कई क्षेत्रों में भूजल पर अत्यधिक निर्भरता देखी जाती है।
महाराष्ट्र
मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे क्षेत्र बार-बार सूखे की मार झेलते हैं। कृषि में अधिक पानी की खपत और अनियमित मानसून के कारण यहां जल संकट गहराता है।
कर्नाटक
उत्तरी कर्नाटक के कई जिलों में कम बारिश और भूजल के लगातार दोहन से गर्मियों के दौरान पेयजल की समस्या बढ़ जाती है।
तमिलनाडु
तमिलनाडु की जल व्यवस्था काफी हद तक मानसून पर निर्भर है। कमजोर बारिश और तेज शहरीकरण के कारण चेन्नई समेत कई शहरों में समय-समय पर गंभीर जल संकट देखने को मिला है।
जल संकट की सबसे बड़ी वजह क्या है?
- भूजल का अत्यधिक दोहन
- अनियमित और बदलता मानसून
- जलवायु परिवर्तन
- बढ़ती आबादी और शहरीकरण
- जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन की कमी
- कृषि में पानी का असंतुलित उपयोग
सरकार क्या कर रही है?
केंद्र सरकार ने जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए कई पहल शुरू की हैं, जिनमें:
- जल शक्ति अभियान
- कैच द रेन अभियान
- जल संचय जन भागीदारी
- जल जीवन मिशन
- वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज परियोजनाएं
इनका उद्देश्य जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना और भूजल स्तर में सुधार करना है।
भारत में जल संकट केवल पर्यावरण की चुनौती नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ा मुद्दा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार, उद्योग और आम नागरिक यदि मिलकर जल संरक्षण को प्राथमिकता दें, तो इस संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।





