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फैक्ट चेक: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330/342 को लेकर वायरल हुआ भ्रामक दावा, पढ़ें पूरा सच

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फैक्ट चेक: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330/342 को लेकर वायरल हुआ भ्रामक दावा, पढ़ें पूरा सच

सोशल मीडिया पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330/342 को लेकर एक पोस्ट वायरल हो रही है। पोस्ट में दावा किया जा रहा है संविधान के अनुच्छेद 330/342 में बताया गया है कि भारत में रहने वाले SC/ST और OBC श्रेणी के लोग हिन्दू नहीं है और वह लोग भारत के मूल निवासी हैं। फेसबुक पर इस पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा गया है कि,”क्या आप जानते है? कि संविधान के अनुच्छेद 330/342 के अनुसार भारत के SC/ST/OBC हिंदू नहीं है। ये भारत के मूलनिवासी हैं।

 

 

फेसबुक पर वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।

 

फैक्ट चेक: 

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल से यह साबित हुआ कि वायरल पोस्ट भ्रामक दावे के साथ शेयर हो रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पोस्ट की सच्चाई जानने के लिए हमने पड़ताल की। पड़ताल के पहले चरण में हमने सबसे पहले संविधान के अनुच्छेद 330/ 342 के बारे जानकारी प्राप्त करने के लिए भारतीय संविधान की कॉपी को खोजना शुरू किया । खोज के दौरान हमें legislative.gov.in की वेबसाइट पर भारतीय संविधान की  PDF फाइल मिली।

पड़ताल के दूसरे चरण में हमने सबसे पहले अनुच्छेद 330 की बारे में खंगाला। जहां-

अनुच्छेद 330

संविधान के भाग 16 में अनुच्छेद 330 मिला। अनुच्छेद को ध्यान से पढ़ने पर हमें पता चला कि इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए लोकसभा में सीटों के आरक्षण के प्रावधान का जिक्र किया गया है। इस अनुच्छेद में तीन खंड हैं, जहां जातियों के आरक्षण का वर्णन है।

  1. लोकसभा में सीटें इन श्रेणी के लोगों के लिए आरक्षित की गयी है

क) अनुसूचित जाति के लिए

असम के स्वशासी जिलों में अनुसूचित जनजातियों को छोड़कर अन्य अनुसूचित जनजाति के लिए, और

ग) असम में स्वशासी जिलों में अनुसूचित जनजातियों के लोगों के लिए स्थान आरक्षित रहेंगे।

 

बता दें, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 330 को पढ़ने पर हमें कहीं भी ऐसा लिखा नहीं मिला है, जहां यह जिक्र किया गया हो कि SC,ST और OBC के लोग हिंदू नहीं है। जबकि अनुच्छेद 330 में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आने वाले लोगों के लिए सीट आरक्षण के बारे में बताया गया है।

पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने अनुच्छेद 342 के बारे में खोजना शुरू किया।

अनुच्छेद 342 

इसके बाद हमने अनुच्छेद 342 के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए खंगाला। अनुच्छेद में लिखा है कि राष्ट्रपति किसी भी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के संबंध में और जहां वो राज्य है, वहां उसके राज्यपाल से परामर्श कर सकता है। राज्यपाल के परामर्श के बाद अधिसूचना द्वारा उन जनजातियों या जनजाति समुदायों के भीतर या समूहों के कुछ हिस्सों को शामिल कर सकेगा।

 

 

बता दें इस अनुच्छेद में अनुसूचित जनजातियों के बारे में बताया गया है। इस पूरे अनुच्छेद को पढ़ने पर हमें कहीं भी SC/ST और OBC श्रेणी के लोगों के हिन्दू न होने के संबंध में कोई जिक्र नहीं प्राप्त हुआ और न ही यहां ‘मूल निवासी’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

इस तरह पड़ताल के दौरान उपरोक्त मिले तथ्यों से यह साबित हुआ कि अनुच्छेद 330 और 342 को लेकर वायरल हो रहा दावा गलत है। अनुच्छेद 330 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत आने वाले लोगों के लिए सीटों के आरक्षण से संबंधित है। जबकि अनुच्छेट 342 अनुसूचित जनजाति से संबंधित प्रावधान है।