विदेश

पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार का बड़ा कदम, ATF के लिए 10,000 करोड़ रुपये का अस्थायी समर्थन

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात के बीच केंद्र सरकार ने विमान ईंधन (एविएशन टर्बाइन फ्यूल-ATF) के लिए 10,000 करोड़ रुपये के विशेष समर्थन तंत्र का प्रस्ताव रखा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कोई सब्सिडी नहीं, बल्कि मौजूदा संकट के दौरान बाजार को स्थिर रखने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था है।

सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और परिवहन लागत पर असर पड़ सकता है। ऐसे में विमानन क्षेत्र को अचानक बढ़ती लागत से बचाने और सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी सतर्क है। देश के करीब 50 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होता है। यदि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में कोई बाधा आती है, तो इसका असर तेल आपूर्ति और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

इसी बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत की। इस दौरान क्षेत्र से गुजर रहे भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। अधिकारियों के अनुसार, इस कूटनीतिक प्रयास से भारतीय जहाज बिना किसी रुकावट के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में लंबे समय तक तनाव बने रहने पर तेल की कीमतों, व्यापार मार्गों और आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है। इससे भारत के आर्थिक लक्ष्यों को भी चुनौती मिल सकती है।

सरकार ने दोहराया है कि ATF सहायता पैकेज केवल अस्थायी बाजार अस्थिरता से निपटने और ऊर्जा व परिवहन सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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