US Tariff Bill: रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ की तैयारी? अमेरिकी सीनेटरों के नए बिल से बढ़ी चिंता

US Tariff Bill: अमेरिका में पेश किए गए एक नए विधेयक (Bill) ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी सीनेटरों ने ऐसा बिल पेश किया है, जिसके तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों के निर्यात पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इस सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। यदि यह बिल कानून बनता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और ऊर्जा सुरक्षा पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
क्या है नया अमेरिकी बिल?
यह विधेयक रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। पहले इस प्रस्ताव में 500% तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी, लेकिन नए संशोधित मसौदे में इसे घटाकर 100% तक कर दिया गया है।
अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि रूस से बड़े पैमाने पर तेल खरीदने वाले देशों पर यह टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि अंतिम टैरिफ दर का फैसला United States Trade Representative (USTR) की सिफारिश के बाद होगा।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत वर्तमान में रूस से कच्चा तेल खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है। यूक्रेन युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बाद भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल का आयात बढ़ाया है।
रिपोर्टों के अनुसार, जून 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 34% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। ऐसे में यदि अमेरिका यह नया बिल लागू करता है, तो भारत के निर्यात और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर दबाव बढ़ सकता है।
पहले भी लगा चुका है अमेरिका अतिरिक्त टैरिफ
अगस्त 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ 50% तक पहुंच गया था।
हालांकि, बाद में अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधा के कारण ऊर्जा संकट गहराने पर अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर अस्थायी छूट (Waiver) दी थी, जिससे भारत ने फिर से आयात बढ़ाया।
व्यापार समझौते पर पड़ सकता है असर
भारत और अमेरिका इस समय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों का लक्ष्य मौजूदा व्यापारिक शुल्कों को कम करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नया टैरिफ बिल पारित हो जाता है, तो दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता प्रभावित हो सकती है और रणनीतिक संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
अभी कानून नहीं बना है बिल
फिलहाल यह केवल अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया प्रस्ताव है। इसे कानून बनने से पहले कई विधायी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसलिए भारत पर तत्काल किसी नए टैरिफ का प्रभाव नहीं पड़ेगा।
हालांकि, यदि भविष्य में यह विधेयक पारित होता है, तो भारत को अपनी ऊर्जा आयात नीति और अमेरिका के साथ व्यापारिक रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।






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