बेंगलुरु में अवैध कार मॉडिफिकेशन पर कार्रवाई, केरल के छात्र से ₹1.11 लाख का जुर्माना

बेंगलुरु में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने का एक मामला सामने आया है, जिसमें केरल के एक छात्र को भारी जुर्माना भरना पड़ा। छात्र अपनी कार में अवैध रूप से मॉडिफाइड एग्जॉस्ट लगाकर सड़क पर गाड़ी चला रहा था, जिससे एग्जॉस्ट से आग की लपटें निकल रही थीं। इस खतरनाक और गैरकानूनी हरकत के लिए येलहंका रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) ने उस पर ₹1.11 लाख का जुर्माना लगाया और वाहन को जब्त कर लिया गया।
बेंगलुरु सिटी ट्रैफिक पुलिस ने इस कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कार के एग्जॉस्ट से चलते समय आग निकल रही है। इसके बाद जुर्माने की रसीद दिखाई जाती है, जिसमें ₹1,11,500 की रकम दर्ज है। वीडियो के अंत में एक पुलिस अधिकारी जब्त की गई कार के पास खड़ा नजर आता है।
इस मामले पर बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़कें स्टंट करने की जगह नहीं हैं। पुलिस ने लिखा कि अगर एग्जॉस्ट से आग निकलेगी तो उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। साथ ही लोगों को चेतावनी दी गई कि इस तरह के मॉडिफिकेशन न केवल गैरकानूनी हैं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकते हैं।
भारत में कार मॉडिफिकेशन को लेकर नियम पूरी तरह सख्त हैं। देश में गाड़ियों में बदलाव की अनुमति है, लेकिन केवल तय सीमाओं के भीतर। कोई भी ऐसा मॉडिफिकेशन जो सड़क सुरक्षा को प्रभावित करे, शोर या प्रदूषण बढ़ाए या वाहन की मूल संरचना से छेड़छाड़ करे, उसे कानून की नजर में गलत माना जाता है।
कानूनी रूप से कुछ मॉडिफिकेशन की इजाजत दी गई है। उदाहरण के तौर पर, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट यानी ECU की रीमैपिंग की जा सकती है, लेकिन इसके बाद भी गाड़ी को प्रदूषण मानकों पर खरा उतरना जरूरी होता है और PUC टेस्ट पास करना अनिवार्य है। परफॉर्मेंस से जुड़े कुछ पार्ट्स जैसे एयर फिल्टर या इंजन के अंदरूनी हिस्सों में बदलाव तब तक मान्य हैं, जब तक उनसे शोर और उत्सर्जन तय सीमा से ज्यादा न बढ़े। सस्पेंशन में बदलाव भी किए जा सकते हैं, लेकिन इससे गाड़ी की ग्राउंड क्लीयरेंस में बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए।
इसके अलावा, आरटीओ से स्वीकृत CNG किट लगवाना पूरी तरह कानूनी है, बशर्ते इसे वाहन की आरसी में अपडेट कराया जाए। दिव्यांग चालकों के लिए गाड़ी में किए गए विशेष बदलाव भी मान्य हैं, लेकिन ऐसे वाहन को “एडाप्टेड व्हीकल” के रूप में पंजीकृत करना जरूरी होता है। बॉडी रैप की अनुमति है, अगर गाड़ी का मूल रंग वही रहे, जबकि रंग बदलने के लिए आरटीओ की मंजूरी और आरसी में बदलाव जरूरी है। बोल्ट-ऑन बॉडी किट भी तब तक वैध मानी जाती हैं, जब तक वे गाड़ी के चेसिस या सेफ्टी सिस्टम को नुकसान न पहुंचाएं।
वहीं, कई तरह के मॉडिफिकेशन पूरी तरह गैरकानूनी हैं। बहुत ज्यादा आवाज करने वाले आफ्टरमार्केट एग्जॉस्ट, प्रेशर या एयर हॉर्न, बिना अनुमति इंजन बदलना और तय सीमा से ज्यादा डार्क विंडो टिंट लगाना कानून के खिलाफ है। इसी तरह, अतिरिक्त या ऊंची लाइट्स जो सामने से आने वाले ड्राइवरों को चकाचौंध करें, बुल बार या क्रैश गार्ड जो एयरबैग और सेफ्टी सिस्टम को प्रभावित करें, और गाड़ी की संरचना में बड़े बदलाव जैसे छत काटना या बॉडी टाइप बदलना भी अवैध हैं। इसके अलावा, फैंसी या बदली हुई नंबर प्लेट भी मान्य नहीं हैं, क्योंकि केवल हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट ही कानूनन सही मानी जाती हैं।
यह मामला एक बार फिर यह साफ करता है कि स्टाइल और स्टंट के चक्कर में नियम तोड़ना महंगा पड़ सकता है। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे वाहन चलाते समय कानून का पालन करें, क्योंकि सार्वजनिक सड़कें किसी भी तरह के स्टंट या खतरनाक प्रयोग के लिए नहीं हैं।





