भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन पहली बार जाएंगे अंतरिक्ष, ISS पर बिताएंगे 240 दिन

Washington DC: भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अपने पहले अंतरिक्ष मिशन के लिए तैयार हैं। NASA के अनुसार, अनिल मेनन 14 जुलाई 2026 को रूस के Soyuz MS-29 अंतरिक्ष यान के जरिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए रवाना होंगे। इस मिशन के दौरान वह लगभग 240 दिन अंतरिक्ष में बिताएंगे और कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों में हिस्सा लेंगे।
ISS पर करीब 8 महीने रहेंगे अनिल मेनन
NASA ने बताया कि अनिल मेनन Expedition 74 और Expedition 75 मिशनों का हिस्सा होंगे। उनका अंतरिक्ष यान कजाकिस्तान के बैकोनूर कोस्मोड्रोम से लॉन्च किया जाएगा।
मिशन के तहत मेनन और उनकी टीम 2027 की शुरुआत तक अंतरिक्ष स्टेशन पर रह सकती है। इस दौरान वे मानव शरीर पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव और भविष्य के चंद्रमा एवं मंगल मिशनों से जुड़े शोध कार्य करेंगे।
भारतीय मूल के हैं अनिल मेनन
अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ था। वह भारतीय और यूक्रेनी मूल के परिवार से आते हैं। भारतीय मूल होने के कारण उनके इस मिशन को भारत में भी काफी उत्साह के साथ देखा जा रहा है।
वह उन अंतरिक्ष यात्रियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिनकी भारतीय जड़ें हैं और जो वैश्विक अंतरिक्ष अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
रूसी अंतरिक्ष यात्रियों के साथ करेंगे यात्रा
अनिल मेनन इस मिशन में अकेले नहीं होंगे। उनके साथ रूसी कॉस्मोनॉट प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना भी अंतरिक्ष यात्रा पर जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत यह मिशन संचालित किया जा रहा है।
मानव शरीर पर अंतरिक्ष के प्रभावों का होगा अध्ययन
NASA के अनुसार, मिशन के दौरान वैज्ञानिक यह अध्ययन करेंगे कि लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से मानव शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। शोध में रक्त प्रवाह, नसों की संरचना और अंतरिक्ष में चिकित्सा सुविधाओं से जुड़े प्रयोग शामिल होंगे।
इसके अलावा अंतरिक्ष स्टेशन के जल संसाधनों का उपयोग कर अंतःशिरा (IV) द्रव तैयार करने की तकनीक का भी परीक्षण किया जाएगा। इन अध्ययनों से भविष्य के चंद्रमा और मंगल मिशनों को मदद मिलने की उम्मीद है।
अंतरिक्ष और चिकित्सा क्षेत्र में लंबा अनुभव
अनिल मेनन एक प्रशिक्षित चिकित्सक, इंजीनियर, फ्लाइट सर्जन और NASA अंतरिक्ष यात्री हैं। वर्षों के प्रशिक्षण और अंतरिक्ष चिकित्सा के अनुभव के बाद उन्हें यह पहला अंतरिक्ष मिशन सौंपा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उनके शोध से न केवल अंतरिक्ष यात्रियों को लाभ मिलेगा, बल्कि पृथ्वी पर स्वास्थ्य सेवाओं में भी नई तकनीकों के विकास का रास्ता खुलेगा।
अंतरिक्ष विज्ञान में भारत के लिए गर्व का क्षण
भारतीय मूल के अनिल मेनन का यह मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। ISS पर उनका 240 दिनों का प्रवास मानव अंतरिक्ष अन्वेषण और भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए अहम जानकारी जुटाने में मदद करेगा।





