पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल से 7.68 करोड़ की साइबर ठगी, फर्जी मैसेज के जरिए कर्मचारी को बनाया शिकार

New Delhi : पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। साइबर अपराधियों ने उनकी पहचान का दुरुपयोग करते हुए उनके एक कर्मचारी को झांसे में लिया और करीब ₹7.68 करोड़ अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नरेश गुजराल भारत के पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल (आई.के. गुजराल) के पुत्र हैं। आई.के. गुजराल ने वर्ष 1997 से 1998 के बीच देश के 12वें प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया था।
सोशल मीडिया पर बनाई फर्जी पहचान
पुलिस के अनुसार, यह साइबर धोखाधड़ी 12 जून से 16 जून के बीच हुई। आरोपियों ने एक सोशल मीडिया मैसेजिंग अकाउंट बनाया, जिस पर नरेश गुजराल की तस्वीर लगी हुई थी।
इस फर्जी अकाउंट के जरिए ठगों ने गुजराल के उस कर्मचारी से संपर्क किया, जो उनके वित्तीय लेन-देन को संभालने के लिए अधिकृत था।
RTGS के जरिए ट्रांसफर कराए करोड़ों रुपये
साइबर ठगों ने कर्मचारी को संदेश भेजकर तत्काल व्यावसायिक जरूरतों का हवाला दिया और RTGS के माध्यम से रकम ट्रांसफर करने के निर्देश दिए।
कर्मचारी ने संदेशों को वास्तविक समझते हुए चार दिनों के दौरान चार अलग-अलग RTGS ट्रांजैक्शन किए और कुल ₹7.68 करोड़ ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में भेज दिए।
बेटी को हुई जानकारी, तब खुला मामला
इस ठगी का खुलासा 16 जून को हुआ, जब नरेश गुजराल की बेटी की नजर इन लेन-देन पर पड़ी। जांच करने पर पता चला कि गुजराल ने ऐसी कोई वित्तीय अनुमति या निर्देश जारी ही नहीं किए थे।
इसके बाद तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
₹4.28 करोड़ की राशि होल्ड पर
पुलिस ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई की गई और विभिन्न बैंकों में भेजी गई रकम को ट्रैक किया गया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, ठगी गई कुल राशि में से ₹4.28 करोड़ को विभिन्न बैंकों में लियन (Lien) मार्क कर दिया गया है, जिससे उस राशि को फिलहाल निकाला नहीं जा सकेगा।
पुलिस आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
बढ़ते साइबर अपराधों पर फिर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर अपराधी अब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लोगों की पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वित्तीय निर्देश को लागू करने से पहले फोन या अन्य माध्यम से उसकी पुष्टि करना बेहद जरूरी है।





