”जरूरत पड़ने पर अपनी जमीन वापस ले सकती है सरकार” – जिमखाना मुद्दे पर Urban Affairs मंत्री का बयान

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी के सबसे पॉश और संवेदनशील इलाके में स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब (Delhi Gymkhana Club) की लीज पर दी गई जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री एम.एल. खट्टर (M.L. Khattar) ने स्पष्ट किया कि सरकार विकास और सार्वजनिक सुरक्षा आवश्यकताओं के लिए लीज समाप्त होने से पहले भी जमीन वापस ले सकती है।
रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की तैयारी
लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने क्लब को 5 जून तक परिसर सौंपने का आदेश दिया है। इस 27.3 एकड़ के भूखंड का उपयोग “रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत और सुरक्षित करने” (Strengthening and securing defence infrastructure) और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुरक्षा उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
यह स्थान बेहद संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास के बिल्कुल बगल में स्थित है।
जमीन वापस लेने पर क्या बोले केंद्रीय मंत्री?
ब्रिक्स अर्बनाइजेशन फोरम (BRICS Urbanisation Forum) के संबंध में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में
बोलते हुए एम.एल. खट्टर ने कहा:
”भूमि शहरी विकास की एक बुनियादी विशेषता है। लीज पर दी गई जमीन को उसकी अवधि समाप्त होने पर या उससे पहले भी किसी अन्य उपयोग के लिए खाली कराया जा सकता है। हमारे पास जमीन का कोई अन्य स्रोत नहीं है, इसलिए विकास की जरूरतों के लिए हमें इस जमीन का उपयोग करना होगा।”
क्लब का ऐतिहासिक महत्व
इस क्लब का इतिहास 1913 से शुरू होता है। आजादी से पहले इसे ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के नाम से जाना जाता था। 1930 के दशक में निर्मित इमारतें शहर के हाई-सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेटिव जोन में आती हैं। सरकार के इस बड़े फैसले से अब इस ऐतिहासिक परिसर का उपयोग देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए किया जाएगा।





