
भारत और दक्षिण कोरिया ने जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) और समुद्री क्षेत्र में कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए एक अहम समझौता किया है। इस पहल का उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत समुद्री शक्ति बनाना है।
पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) ने कोरिया इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (KOICA) के साथ मिलकर इस योजना को लागू करने का समझौता किया है। यह पहल “मैरिटाइम अमृत काल विजन 2047” के तहत चलाई जाएगी, जिससे भारत के समुद्री क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।
इस साझेदारी के तहत दक्षिण कोरिया की एजेंसियां भारत के जहाज निर्माण और मरीन इंजीनियरिंग सेक्टर का गहराई से अध्ययन करेंगी। इसमें यह देखा जाएगा कि कहां-कहां स्किल की कमी है और कैसे बेहतर ट्रेनिंग देकर इसे पूरा किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह सहयोग भारत को भविष्य के लिए तैयार और तकनीकी रूप से मजबूत वर्कफोर्स बनाने में मदद करेगा। इससे भारत को एक वैश्विक शिपबिल्डिंग हब बनने में भी सहायता मिलेगी।
इस परियोजना के तहत दोनों देशों में वर्कशॉप आयोजित की जाएंगी, जहां उद्योग विशेषज्ञ, नीति निर्माता और शिक्षाविद मिलकर अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा, भारत में एक “शिपबिल्डिंग वर्कफोर्स डेवलपमेंट एंड टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन सेंटर” बनाने पर भी चर्चा चल रही है। यह केंद्र ट्रेनिंग, तकनीकी कौशल और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम करेगा।
इस साझेदारी से भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।





