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US-Iran युद्ध में चीन की छिपी भूमिका? सौरभ शुक्ला ने उठाए बड़े सवाल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच वैश्विक राजनीति में नए सवाल उठने लगे हैं। NewsMobile के Editor-in-Chief सौरभ शुक्ला ने संकेत दिया है कि इस संघर्ष के पीछे चीन की रणनीतिक भूमिका हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह युद्ध अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष तक सीमित नहीं रह गया है और इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर देखा जा सकता है।

क्षेत्रीय संघर्ष से आगे बढ़ रहा है युद्ध’

Republic TV के शो ‘The Debate with Arnab Goswami’ में चर्चा के दौरान सौरभ शुक्ला ने कहा कि मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि यह संघर्ष जल्द ही बड़े वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।

उन्होंने कहा, “मौजूदा हालात को देखते हुए यह लड़ाई अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गई है। इसे भले ही विश्व युद्ध कहना जल्दबाज़ी होगी, लेकिन इसका असर दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है।”

क्या चीन पर्दे के पीछे सक्रिय है?

डिबेट के दौरान जब एंकर अर्नब गोस्वामी ने पूछा कि ईरान की सैन्य रणनीति के पीछे कौन हो सकता है, तो सौरभ शुक्ला ने कहा कि चीन की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा, “जो कुछ भी हो रहा है, उसमें ईरान से आगे भी किसी रणनीतिक दिमाग के काम करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मैं इसे चीन से जोड़कर देखने की संभावना को खारिज नहीं करूंगा।”

तेल आपूर्ति और चीन की चिंता

सौरभ शुक्ला के अनुसार, इस युद्ध का सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो तेल आपूर्ति पर निर्भर हैं, और इस मामले में चीन सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि पहले वेनेजुएला और अब ईरान के तेल आपूर्ति पर संकट के कारण चीन को भारी आर्थिक और ऊर्जा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उनका कहना था कि भले ही चीन इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल न हो, लेकिन रणनीतिक तौर पर उसे इससे कुछ लाभ भी मिल सकता है।

ईरान के हथियारों पर भी उठे सवाल

सौरभ शुक्ला ने ईरान के उन्नत हथियार प्रणालियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ईरान के पास मौजूद कई बैलिस्टिक मिसाइल और रक्षा प्रणाली पूरी तरह से घरेलू तकनीक से विकसित नहीं हुई हैं।

उन्होंने बताया कि इन हथियार प्रणालियों में कुछ तकनीक चीन और रूस जैसे देशों के साथ हुए समझौतों या बार्टर व्यवस्था के जरिए हासिल की गई हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा युद्ध में इन हथियारों की वास्तविक क्षमता और सीमाएं भी सामने आ रही हैं।

बड़े वैश्विक टकराव की आशंका

सौरभ शुक्ला ने चेतावनी दी कि अगर चीन जैसे बड़े देश इस संघर्ष में खुलकर शामिल होते हैं तो यह स्थिति एक बड़े वैश्विक युद्ध का रूप ले सकती है।

उन्होंने कहा, “अगर चीन जैसे देश खुले तौर पर इस संघर्ष में उतरते हैं, तो यह निश्चित रूप से विश्व युद्ध की स्थिति पैदा कर सकता है।”

फिलहाल, उनके मुताबिक यह संघर्ष प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय रणनीतिक गठबंधनों और अप्रत्यक्ष समर्थन के जरिए आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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