भारत

देश की पहली आतंकवाद-रोधी नीति ‘प्रहार’ जारी, तीनों मोर्चों पर खतरे से निपटने की रणनीति तैयार

केंद्र सरकार ने देश की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति जारी की है। गृह मंत्रालय (एमएचए) ने सोमवार, 23 फरवरी 2026 को यह नीति अपनी वेबसाइट पर अपलोड की। इस नीति का नाम “प्रहार (PRAHAAR)” रखा गया है। सरकार ने साफ किया है कि भारत आतंकवाद को किसी खास धर्म, जाति, राष्ट्रीयता या सभ्यता से जोड़कर नहीं देखता।

तीनों मोर्चों पर खतरा: जमीन, जल और हवा

नई नीति में कहा गया है कि भारत को जमीन, जल और हवाई तीनों मोर्चों पर आतंकी खतरों का सामना करना पड़ रहा है। देश की अहम आर्थिक और रणनीतिक संस्थाओं—जैसे बिजली, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा—की सुरक्षा के लिए क्षमताएं विकसित की गई हैं, ताकि राज्य और गैर-राज्य तत्वों से निपटा जा सके।

सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद पर फोकस

नीति में कहा गया है कि भारत लंबे समय से “सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद” से प्रभावित रहा है। जिहादी आतंकी संगठन और उनके सहयोगी भारत में हमलों की साजिश रचते और उन्हें अंजाम देने की कोशिश करते रहते हैं।

भारत को वैश्विक आतंकी संगठनों जैसे अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) से भी खतरा बताया गया है। नीति के अनुसार, ये संगठन ‘स्लीपर सेल’ के जरिए देश में हिंसा भड़काने की कोशिश करते हैं।

ड्रोन, साइबर अटैक और नई तकनीक का खतरा

गृह मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि आतंकी संगठनों के विदेशी हैंडलर ड्रोन जैसी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, खासकर पंजाब और जम्मू-कश्मीर में। इसके अलावा, साइबर हमलों के जरिए भी भारत को निशाना बनाया जा रहा है।

सोशल मीडिया, इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप, एन्क्रिप्शन, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल आतंकियों द्वारा फंडिंग, प्रचार और हमलों की योजना बनाने में किया जा रहा है, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

CBRNED सामग्री और रोबोटिक्स पर चिंता

नीति में कहा गया है कि रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु, विस्फोटक और डिजिटल (CBRNED) सामग्री तक आतंकियों की पहुंच रोकना एक बड़ी चुनौती है। ड्रोन और रोबोटिक्स के घातक इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई है।

जांच और कानूनी कार्रवाई पर जोर

गृह मंत्रालय ने सुझाव दिया है कि आतंकवाद से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज होने से लेकर अभियोजन तक हर चरण में कानूनी विशेषज्ञों को शामिल किया जाए, ताकि दोषियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया जा सके।

नीति में यह भी कहा गया है कि आतंकी संगठन स्थानीय आपराधिक नेटवर्क की मदद से हमले करते हैं। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग भी जरूरी है।

युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने की पहल

मंत्रालय ने बताया कि आतंकी संगठन भारतीय युवाओं को भर्ती करने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए खुफिया और कानून-व्यवस्था एजेंसियां सक्रिय हैं।

कट्टरपंथ की पहचान होने पर युवाओं के लिए “ग्रेडेड पुलिस रिस्पॉन्स” अपनाया जाता है, यानी उनकी कट्टरता के स्तर के अनुसार कानूनी या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं। समुदाय और धार्मिक नेताओं की भूमिका को भी अहम बताया गया है। मध्यमार्गी धार्मिक उपदेशकों और गैर-सरकारी संगठनों की मदद से लोगों को कट्टरपंथ और हिंसा के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

जेलों में भी कट्टरपंथ फैलने से रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाई गई है और डी-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। “प्रहार” नीति के जरिए केंद्र सरकार ने साफ संदेश दिया है कि बदलते तकनीकी और वैश्विक हालात के बीच आतंकवाद से निपटने के लिए सख्त, संगठित और बहुआयामी रणनीति अपनाई जाएगी। सरकार का जोर सुरक्षा के साथ-साथ समाज में जागरूकता और सहयोग बढ़ाने पर भी है, ताकि देश में शांति और सद्भाव बना रहे।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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