राज्यसभा में खरगे बनाम जेपी नड्डा: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जमकर हुई नोकझोंक

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ. सदन में सदन के नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा तथा विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बीच जोरदार बहस देखने को मिली.
नड्डा का राहुल गांधी पर निशाना
सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की अपील करते हुए जेपी नड्डा ने खरगे से कहा कि कांग्रेस पार्टी को एक अबोध बालक का बंधक नहीं बनना चाहिए. यह टिप्पणी सीधे तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए की गई. नड्डा ने कहा कि अबोध और अहंकार का मिश्रण बेहद खतरनाक होता है और कांग्रेस को उस अबोध व्यक्ति से बाहर निकलना चाहिए.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भारत-चीन संबंधों को लेकर पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की पुस्तक से कुछ अंश पढ़ने पर अड़े हुए हैं. लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने मामले को संवेदनशील बताते हुए राहुल गांधी को ऐसा करने की अनुमति नहीं दी. इसी कारण से लोकसभा में पिछले चार दिनों से गतिरोध जारी है. विपक्षी सदस्यों के हंगामे के चलते बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब नहीं दे पाए.
राज्यसभा में शुरू से ही हंगामा
गुरुवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि सदन की कार्यवाही में बाधा नहीं डालनी चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने नहीं देने का आरोप सही नहीं है. रिजिजू ने कहा कि निचले सदन में राहुल गांधी को निर्धारित समय से 20 मिनट अधिक समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने बार-बार अध्यक्ष के आदेश की अवहेलना की. अध्यक्ष के बार-बार मना करने के बावजूद वह वही बात दोहराते रहे जिसकी अनुमति नहीं थी.
संसदीय कार्य मंत्री ने यह भी कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में सदन संचालन की प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं और दोनों सदनों का एक-दूसरे से कोई लेना-देना नहीं है.
खरगे का पलटवार
इसके बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सत्ता पक्ष पर जोरदार हमला बोला. हालांकि, उनके एक शब्द को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया गया. खरगे ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों को मिलाकर ही संसद बनती है. यदि एक सदन में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जाएगा तो दूसरे सदन में इसका असर पड़ेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष अहंकार में चूर है और लोकतंत्र को कुचलना चाहता है तथा विपक्ष की आवाज को दबाना चाहता है.
संसद के दोनों सदनों में जारी यह गतिरोध देश की विधायी प्रक्रिया के लिए चुनौती बना हुआ है.





