सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दिल्ली दंगे मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को नहीं मिली जमानत

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया. न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया, जबकि अन्य 5 आरोपियों को जमानत दे दी.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आरोपी बाकी पांच लोगों, गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को ज़मानत दे दी है। (2/2) https://t.co/oYb7dS46vI
— NewsMobile Samachar (@NewsMobileHindi) January 5, 2026
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों का “मुख्य साजिशकर्ता” होने का आरोप है. उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय न्याय संहिता (आईपीसी) के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था.
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए इन दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे. यह हिंसा नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के खिलाफ चल रहे व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी.
इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो सितंबर को दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उमर खालिद सहित अन्य आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था. हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ उमर खालिद और शरजील इमाम जेल में ही रहेंगे, जबकि 5 अन्य आरोपियों को जमानत मिलने से उन्हें राहत मिली है.
2020 दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद को लेकर कोर्ट ने क्या-क्या कहा
- –सुप्रीम कोर्ट का जमानत से इनकार.
- जमानत अर्जी खारिज.
- करीब 5 साल जेल में बिता चुका है खालिद.
- हाईकोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा.
जमानत पर कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत बचाव का मूल्यांकन करने का मंच नहीं है. न्यायिक संयम का मतलब कर्तव्य से पीछे हटना नहीं है. अदालत को सही आवेदन के लिए एक व्यवस्थित जांच करनी होगी. यह देखना जरूरी है कि क्या जांच में प्रथम दृष्टया अपराध सामने आया है और क्या आरोपी की भूमिका का अपराध से कोई उचित संबंध है.





