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लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर सियासी संग्राम: गोगोई का पीएम पर तीखा वार

नई दिल्ली, 8 दिसंबर: लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर हुई बहस के दौरान कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम अपने भाषणों में लगातार पंडित जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस का नाम लेते हैं, जबकि वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गीत के रूप में महत्व देने का काम कांग्रेस ने ही किया था.

गोगोई ने कहा, “कांग्रेस ने वंदे मातरम् का समर्थन किया. इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिलाने में कांग्रेस की अहम भूमिका रही. पीएम मोदी हर बहस में नेहरू जी और कांग्रेस का नाम लेते हैं—‘ऑपरेशन सिंदूर’ में नेहरू जी का नाम 14 बार और कांग्रेस का 50 बार, संविधान के 75 साल पूरे होने के अवसर पर नेहरू जी का नाम 10 बार और कांग्रेस का 26 बार, राष्ट्रपति के 2022 के अभिभाषण में नेहरू जी का नाम 15 बार और 2020 के अभिभाषण में 20 बार लिया गया. मैं विनम्रता से कहना चाहता हूँ कि चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, आप पंडित नेहरू के योगदान पर एक भी दाग नहीं लगा पाएंगे.”

उन्होंने सरकार पर गंभीर मुद्दों को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाते हुए कहा, “देश के लोग परेशान हैं, पर उसका कोई ज़िक्र नहीं हो रहा. पीएम मोदी ने दिल्ली ब्लास्ट का एक बार भी उल्लेख नहीं किया. हम न दिल्ली में नागरिकों की सुरक्षा कर पा रहे हैं, न पहलगाम में. लोग सांस नहीं ले पा रहे हैं.”

पीएम मोदी बोले—‘वंदे मातरम् सिर्फ आज़ादी का नारा नहीं, सांस्कृतिक चेतना का आधुनिक रूप’

संसद के शीतकालीन सत्र के छठे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में वंदे मातरम् को “शक्तिशाली मंत्र” बताते हुए कहा कि इसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को ऊर्जा और दिशा दी. उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इसकी ऐतिहासिक गरिमा को पुनर्स्थापित किया जाए.

पीएम मोदी ने कहा, “वंदे मातरम् केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का मंत्र नहीं था. यह उससे कहीं आगे था—मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के संकल्प का स्वर था. हमारे वेदों में कहा गया है—यह भूमि मेरी माता है, और मैं इसका पुत्र हूँ. प्रभु श्रीराम ने भी इसी भाव को व्यक्त करते हुए लंका का त्याग किया था. वंदे मातरम् हमारी महान सांस्कृतिक विरासत का आधुनिक रूप है.”

प्रधानमंत्री ने ब्रिटिश शासन की ‘डिवाइड एंड रूल’ नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि 1905 में जब बंगाल का विभाजन हुआ, तब
“वंदे मातरम् एक चट्टान की तरह खड़ा रहा.”

उनका कहना था, “ब्रिटिश बंगाल को अपनी प्रयोगशाला बनाकर देश को बांटना चाहते थे, क्योंकि उन्हें पता था कि बंगाल की बौद्धिक क्षमता पूरे राष्ट्र को दिशा और प्रेरणा देती है. उन्होंने सोचा कि अगर बंगाल बंटेगा, तो देश भी बंट जाएगा… लेकिन 1905 में वंदे मातरम् अदम्य शक्ति बनकर खड़ा रहा.”

150 साल का इतिहास, कई महत्त्वपूर्ण पड़ावों का दौर

पीएम मोदी ने बताया कि देश आज कई ऐतिहासिक अवसरों का साक्षी बन रहा है—संविधान के 75 वर्ष, सरदार पटेल और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, और गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान दिवस सहित कई महत्वपूर्ण पड़ाव.

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने स्वतंत्रता संग्राम को साहस, बलिदान और तपस्या का मार्ग दिखाया, और इसे नई पीढ़ियों तक पहुँचाना सरकार की जिम्मेदारी है.

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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