दिल्ली में एक बार फिर जहरीले स्मॉग की चादर, AQI 323 के साथ सांस लेना हुआ मुश्किल

नई दिल्ली, 5 दिसंबर 2025 – राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार की सुबह एक बार फिर घने, जहरीले स्मॉग ने दस्तक दी. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सुबह 8 बजे तक राजधानी का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 323 के स्तर पर पहुंच गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है. हालांकि यह पिछले कुछ हफ्तों की तुलना में मामूली सुधार दिख रहा है, फिर भी कई इलाकों में दृश्यता बेहद कम रही और प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से ऊंचा बना हुआ है.
घने कोहरे की चादर से ढका शहर
गाजीपुर और अक्षरधाम जैसे इलाकों में सुबह के वक्त घना कोहरा और स्मॉग छाया रहा. सुबह-सुबह घर से निकलने वाले लोगों ने बताया कि दृश्यता इतनी कम थी कि कुछ मीटर दूर की चीजें भी साफ नजर नहीं आ रही थीं. CPCB द्वारा जारी आंकड़ों से स्पष्ट है कि राजधानी के अधिकांश हिस्सों में वायु गुणवत्ता “बहुत खराब” श्रेणी में बनी हुई है.
आनंद विहार सबसे प्रदूषित, कई इलाकों में AQI 300 के पार
आनंद विहार इलाका सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्रों में से एक बना हुआ है, जहां AQI 348 दर्ज किया गया. सोनिया विहार में वायु गुणवत्ता सूचकांक 343 तक पहुंच गया, जबकि वजीरपुर में स्थिति और भी चिंताजनक रही, जहां AQI 358 रिकॉर्ड किया गया. बवाना क्षेत्र में भी AQI 325 रहा — ये सभी इलाके “बहुत खराब” श्रेणी में शामिल हैं.
इसके विपरीत, NSIT द्वारका में अपेक्षाकृत कम AQI 269 दर्ज किया गया, जिसे “खराब” कैटेगरी में रखा गया है. अक्षरधाम इलाके में स्मॉग की एक मोटी परत ने पूरे क्षेत्र को ढक लिया, जहां AQI फिर से 348 के स्तर तक जा पहुंचा.
“बहुत खराब” का मतलब है सेहत के लिए खतरा
राष्ट्रीय AQI पैमाने के अनुसार, 301 से 400 के बीच की रीडिंग “बहुत खराब” श्रेणी में आती है. यह ऐसा स्तर है जो स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है, विशेष रूप से संवेदनशील समूहों — जैसे बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से ग्रस्त लोगों — के लिए यह बेहद हानिकारक है. इस स्तर पर बाहर जाने से सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
मुख्यमंत्री ने बुलाई समीक्षा बैठक
लगातार बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को दिल्ली सचिवालय में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की. इस बैठक का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में चल रहे प्रदूषण नियंत्रण प्रयासों की समीक्षा करना और प्रदूषण से निपटने की रणनीतियों को और अधिक मजबूत बनाना था.
यह स्पष्ट है कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता एक गंभीर चुनौती बनी हुई है और जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाते, राजधानी के निवासियों को इस जहरीली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.





