रिश्वतखोरी और फर्जीवाड़े का नेटवर्क उजागर, सीबीआई ने दो फर्जी अफसरों को किया गिरफ्तार

सीबीआई ने फर्जीवाड़ा और रिश्वतखोरी का गिरोह चलाने के आरोप में दो कथित ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान अजीत कुमार पात्रा और मिंकु लाल जैन के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पर लोगों को झूठी पहचान बताकर ठगने और सरकारी अधिकारियों के नाम पर धमकाने के आरोप हैं।
सीबीआई ने बताया कि दोनों आरोपियों ने खुद को केंद्रीय एजेंसियों से जुड़ा अधिकारी बताकर सरकारी सुविधाओं का गलत इस्तेमाल किया। वे शीर्ष अधिकारियों से जान-पहचान का दावा करते हुए लोगों को डराते-धमकाते थे।
पात्रा और जैन सरकारी परिसरों में वीआईपी प्रोटोकॉल का लाभ उठाते थे। दोनों सरकारी आवासों में रहते थे, प्रतिबंधित इलाकों में बेरोक-टोक आते-जाते थे और कई सरकारी व धार्मिक कार्यक्रमों में वीआईपी मेहमान के तौर पर शामिल होते थे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब 4 नवंबर को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (DGGI) की टीम ने एक निजी कंपनी के सीईओ विनोद परिहार के ठिकानों पर छापेमारी की। गिरफ्तारी से बचने के लिए परिहार ने कथित तौर पर दोनों ठगों से संपर्क किया। आरोप है कि पात्रा और जैन ने मामला सुलझाने के नाम पर 18 लाख रुपये की रिश्वत मांगी।
इस जानकारी पर कार्रवाई करते हुए सीबीआई ने दोनों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया और मौके से 18 लाख रुपये की रकम बरामद की।
सीबीआई ने जांच के दौरान दोनों के पास से अकूत संपत्ति बरामद की है। एजेंसी ने बताया कि आरोपियों के पास से 3.7 करोड़ रुपये नकद, करीब एक किलो सोने के आभूषण, पात्रा और उसके रिश्तेदारों के नाम पर 26 संपत्तियों के दस्तावेज, चार लग्जरी कारें, 12 अन्य वाहन और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं।
छापेमारी दिल्ली, राजस्थान और ओडिशा के विभिन्न ठिकानों पर की गई। सीबीआई अब दोनों आरोपियों के नेटवर्क और संभावित सरकारी संपर्कों की जांच कर रही है।





