ECI की ‘विशेष गहन संशोधन’ प्रक्रिया से साफ हुई मतदाता सूची, बिहार में टूटा वोटिंग का रिकॉर्ड

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में जिस रिकॉर्डतोड़ 64.66 प्रतिशत मतदान ने सभी का ध्यान खींचा, उसके पीछे एक बड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया quietly काम कर रही थी — Election Commission of India (ECI) की “विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया” (Special Intensive Revision – SIR)। इस अभियान ने राज्य की मतदाता सूची को न केवल अपडेट किया, बल्कि पारदर्शिता और सटीकता के नए मानक भी तय किए।
क्या है ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) प्रक्रिया?
ECI ने 24 जून 2025 को बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का आदेश जारी किया, जिसमें 1 जुलाई 2025 को “अर्हता तिथि” (Qualifying Date) तय की गई। इस प्रक्रिया का उद्देश्य था मतदाता सूची को पूरी तरह अप-टू-डेट और साफ करना — ताकि मृत, माइग्रेटेड, या दोहरी सूची में शामिल नामों को हटाया जा सके और केवल योग्य मतदाता ही सूची में रहें।
SIR के तहत चुनाव आयोग ने घर-घर सत्यापन अभियान चलाया। अधिकारियों ने मतदाताओं से दस्तावेजी जानकारी जुटाई, स्थानीय स्तर पर पहचान की जांच की और विवादित प्रविष्टियों को हटाया।
97 प्रतिशत कवरेज का दावा, बढ़ा भरोसा
चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार में इस प्रक्रिया के तहत लगभग 97% मतदाताओं को कवर किया गया। यह अब तक के सबसे व्यापक पुनरीक्षण अभियानों में से एक था। इससे न केवल “फर्जी” या “दोहराए गए” नाम हटे, बल्कि आम मतदाताओं में यह भरोसा भी बढ़ा कि उनकी वोट की कीमत सुरक्षित है और हर व्यक्ति का नाम सही जगह सूचीबद्ध है।
ECI के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक मतदाता सूची जितनी सटीक होगी, उतना ही लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होंगी। SIR प्रक्रिया ने बिहार में पारदर्शिता और विश्वास को नई ऊँचाई दी है।
कैसे जुड़ा रिकॉर्डतोड़ मतदान दर से?
विशेषज्ञों का मानना है कि साफ-सुथरी मतदाता सूची से लोगों में मतदान के प्रति आत्मविश्वास बढ़ा। 2020 में जहाँ पहले चरण में लगभग 57% मतदान हुआ था, वहीं इस बार यह 64.66% तक पहुँच गया — यानी करीब 8% की बढ़ोतरी। Election Commission की बेहतर तैयारी, मतदाता जागरूकता अभियानों और लिस्ट क्लीनिंग की वजह से लोगों ने मतदान को एक “लोकतंत्र के उत्सव” की तरह अपनाया।
बिहार में रिकॉर्डतोड़ मतदान सिर्फ राजनीतिक उत्साह का परिणाम नहीं था, बल्कि यह उस प्रशासनिक सफाई का फल था, जो चुपचाप परंतु निर्णायक रूप से की गई। Election Commission की “विशेष गहन संशोधन” प्रक्रिया ने यह दिखा दिया कि जब मतदाता सूची सटीक और भरोसेमंद होती है, तो जनता लोकतंत्र पर और भी गहरा विश्वास जताती है।





