जयशंकर ने समिट में उठाया आतंकवाद का मुद्दा — कहा ज़ीरो टॉलरेंस ही एकमात्र रास्ता

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हो रही 20वीं ईस्ट एशिया समिट में भारत की ओर से अपने विचार रखे। यह शिखर सम्मेलन एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 18 देशों — जिनमें भारत, अमेरिका, चीन, जापान और आसियान देश शामिल हैं — को राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर एक मंच पर लाता है। इस वर्ष यह समिट अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रही है।
जयशंकर ने शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सभी देशों को शुभकामनाएं दीं और पूर्वी एशियाई देश तिमोर लेस्ते (East Timor) का स्वागत किया, जो पहली बार इस फोरम में शामिल हुआ है। तिमोर लेस्ते दक्षिण-पूर्व एशिया का एक छोटा द्वीपीय देश है, जिसने वर्ष 2002 में इंडोनेशिया से स्वतंत्रता प्राप्त की थी।
जयशंकर ने वर्तमान वैश्विक स्थिति को “जटिल” बताते हुए कहा कि सप्लाई चेन अस्थिर हो गई हैं, बाजारों तक पहुंच सीमित हो रही है और तकनीक व प्राकृतिक संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा व्यापार पर दबाव बढ़ रहा है और सिद्धांतों को अक्सर चयनात्मक रूप से लागू किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इन नई चुनौतियों के बीच दुनिया को नए समाधान तलाशने होंगे। प्रतिस्पर्धा, तकनीक, डिजिटलीकरण और कनेक्टिविटी को विकास के मुख्य स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि “मल्टीपोलर दुनिया अब सिर्फ बनी नहीं रहेगी, बल्कि और मजबूत होगी।” वैश्विक संघर्षों पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि युद्धों ने ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिए गंभीर खतरे पैदा किए हैं। उन्होंने गाजा संकट के शांतिपूर्ण समाधान और यूक्रेन युद्ध के जल्द अंत की अपील दोहराई।
आतंकवाद पर कड़ा रुख जताते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया को “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम करना चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि आतंक के खिलाफ आत्मरक्षा का अधिकार कभी समझौते में नहीं आ सकता। जयशंकर ने भारत द्वारा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि साल 2026 को आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान गुजरात के लोथल में एक Maritime Heritage Festival और एक Maritime Security Conference आयोजित की जाएगी।
उन्होंने म्यांमार का मुद्दा उठाते हुए बताया कि हालिया भूकंप के दौरान भारत ने तुरंत मदद पहुंचाई थी और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय हाईवे प्रोजेक्ट में प्रगति हो रही है। साथ ही उन्होंने ऑनलाइन धोखाधड़ी केंद्रों का ज़िक्र किया, जिनमें भारतीय नागरिक फंसे हैं, और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
समापन में जयशंकर ने कहा कि ईस्ट एशिया समिट “शांति, प्रगति और समृद्धि” के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है और भारत इसकी प्रतिबद्धता हमेशा निभाता रहेगा।





