ग्रामीण बेटियों की शिक्षा का परचम, एजुकेट गर्ल्स को एशिया का सबसे बड़ा पुरस्कार

ग्रामीण इलाकों में स्कूल छोड़ चुकी लड़कियों को पढ़ाई से जोड़ने वाली भारतीय संस्था एजुकेट गर्ल्स को 2025 का रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। इस अवार्ड को एशिया का सबसे बड़ा सार्वजनिक सेवा सम्मान माना जाता है.
अवार्ड फाउंडेशन ने रविवार को विजेताओं की घोषणा की। अन्य सम्मानितों में मालदीव की शाहिना अली शामिल हैं, जिन्हें समुद्री जीवन संरक्षण के लिए चुना गया। वहीं फिलीपींस के पादरी फ्लावियानो एंटोनियो एल. विलनुएवा को गरीबों और नशा विरोधी अभियान के पीड़ितों की मदद के लिए यह सम्मान दिया जायेगा।
एजुकेट गर्ल्स की शुरुआत सफीना हुसैन ने की थी। संगठन ने राजस्थान से काम शुरू किया और हज़ारों ऐसी लड़कियों को स्कूल में दाखिला दिलाया जो पढ़ाई छोड़ चुकी थीं या कभी स्कूल गई ही नहीं थीं। संस्था का लक्ष्य लड़कियों को पढ़ाई के साथ आत्मविश्वास और कौशल देना है।
2015 में संस्था ने शिक्षा क्षेत्र का पहला डेवलपमेंट इंपैक्ट बॉन्ड शुरू किया। इसके ज़रिये 30 हज़ार से अधिक गांवों और 20 लाख से ज्यादा लड़कियों तक पहुंच बनाई गई। संस्था का ‘प्रगति’ कार्यक्रम भी लोकप्रिय हुआ, जिसके ज़रिये 15 से 29 साल की महिला दौबारा पढ़ाई पूरी कर रही हैं।
सफीना हुसैन ने इसे “ऐतिहासिक पल” बताया और कहा कि यह सम्मान भारत के उस जनआंदोलन को मान्यता देता है जो “एक दूरदराज़ गाँव की एक अकेली लड़की” से शुरू हुआ था।
रेमन मैग्सेसे पुरस्कार 1958 से दिया जा रहा है। यह सम्मान समाज सेवा और ईमानदारी के लिए एशिया का सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता है। भारतीय विजेताओं में मदर टेरेसा, जयप्रकाश नारायण, सत्यजीत रे, अरुणा राय, किरण बेदी, अरविंद केजरीवाल, सोनम वांगचुक और पत्रकार रवीश कुमार शामिल हैं।





