‘सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा’ Axiom-4 मिशन ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला

दिल्ली में मंगलवार को भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने मीडिया से बातचीत की। शुभांशु शुक्ला ने कहा – “भारत आज भी अंतरिक्ष से सारे जहां से अच्छा लगता है।” अंतरिक्ष से लौटने के बाद उन्होंने अपनी ऐतिहासिक यात्रा का अनुभव साझा किया और भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन पर बड़ी जानकारी दी।
#WATCH | Delhi | Group Captain Shubhanshu Shukla says, “… Bharat aaj bhi Antariksh se saare jahaan se achha dikhta hai. Jai Hind, Jai Bharat…” pic.twitter.com/mvq6zoGBqV
— ANI (@ANI) August 21, 2025
शुभांशु ने बताया कि अंतरिक्ष में बिताए 20 दिनों के बाद शरीर गुरुत्वाकर्षण भूल जाता है और पृथ्वी पर लौटने के बाद दोबारा ढलना पड़ता है। उन्होंने एक्सिओम मिशन के बारे में भी जानकारी दी, जिसके तहत वे दो सप्ताह तक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) में रहे। इस दौरान उन्होंने मिशन पायलट और कमांडर के रूप में काम किया। उन्होंने कहा कि इस मिशन में कई वैज्ञानिक प्रयोग किए गए और अंतरिक्ष से पृथ्वी की तस्वीरें ली गईं। लंबी ट्रेनिंग के बाद यह अनुभव उनके जीवन का सबसे यादगार रहा।
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शुभांशु शुक्ला ने गगनयान मिशन की रूपरेखा बताते हुए कहा कि यह इसरो का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन होगा। इसके तहत 2027 में भारतीय वायुसेना के तीन पायलटों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। वे 400 किलोमीटर ऊंचाई पर पृथ्वी की कक्षा में तीन दिन बिताएंगे और फिर हिंद महासागर में सुरक्षित लैंडिंग करेंगे। इस मिशन पर लगभग 20,193 करोड़ रुपए की लागत आएगी। उन्होंने बताया कि गगनयान मिशन से पहले दो खाली टेस्ट फ्लाइट और एक रोबोट मिशन भेजा जाएगा। इन सभी मिशनों की सफलता के बाद ही इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की प्रक्रिया शुरू होगी।
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत की अंतरिक्ष यात्रा को नई गति मिली है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने दक्षिण एशियाई देशों के लिए सैटेलाइट तैयार किया और जी20 देशों के लिए भी सैटेलाइट बनाया। उन्होंने बताया कि 10 साल पहले जहां देश में सिर्फ एक स्पेस स्टार्टअप था, वहीं आज 300 से ज्यादा स्टार्टअप इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। निजी कंपनियों ने अब तक दो सब-ऑर्बिटल मिशन पूरे किए हैं। इससे साफ है कि भारत की स्पेस इकोनॉमी लगातार बढ़ रही है।
#WATCH | Delhi | ISRO Chairman V. Narayanan says, “… After PM Modi took over as the prime minister, the south asian satellite was built, launched and donated to the south asian countries. Under his leadership, we have also realised the G20 satellite for the G20 countries… 10… pic.twitter.com/nA3A8ekHxX
— ANI (@ANI) August 21, 2025
नारायणन ने नासा-इसरो सहयोग पर जानकारी देते हुए कहा कि 30 जुलाई को जीएसएलवी-एफ16 रॉकेट ने नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह उपग्रह पूरी तरह से सही ढंग से काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले 2-3 महीनों में भारत 6,500 किलो का अमेरिकी कम्युनिकेशन सैटेलाइट भी अपने लॉन्च व्हीकल से प्रक्षेपित करेगा। उन्होंने कहा कि यह सहयोग भारत की तकनीकी क्षमता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसरो की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।
#WATCH | Delhi | ISRO Chairman V. Narayanan says, “… GSLV-F16 rocket placing the most prestigious NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar on July 30 perfectly. A satellite jointly released by JPL NASA and ISRO… Today, the satellite is totally perfect… In another 2-3 months, we… pic.twitter.com/UZ8JKChDzb
— ANI (@ANI) August 21, 2025





