बदल गए ICICI के बैंकिंग नियम! मेट्रो से गांव तक बढ़ी मिनिमम बैलेंस लिमिट

देश के दूसरे सबसे बड़े प्राइवेट बैंक ICICI बैंक ने अगस्त 2025 से मेट्रो और शहरी इलाकों में खोले गए सभी बचत खातों के लिए न्यूनतम मासिक औसत बैलेंस (Minimum Average Balance – MAB) की सीमा ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दी है। सेमी-अर्बन शाखाओं में यह सीमा ₹5,000 से बढ़ाकर ₹25,000 और ग्रामीण शाखाओं में ₹2,500 से बढ़ाकर ₹10,000 कर दी गई है।
मासिक औसत बैलेंस वह न्यूनतम राशि है, जो ग्राहक को अपने खाते में हर महीने औसतन बनाए रखनी होती है। अगर यह बैलेंस तय सीमा से कम हो जाता है, तो बैंक जुर्माना वसूलता है। ICICI बैंक ने कहा है कि अगर ग्राहक न्यूनतम बैलेंस नहीं रख पाता, तो उस पर कमी की राशि का 6% या ₹500 (जो भी कम हो) जुर्माना लगेगा। ICICI बैंक, MAB में इतनी बड़ी बढ़ोतरी करने वाला पहला बैंक बन गया है।वित्त मंत्रालय के अनुसार, सरकारी बैंकों ने 2020-21 से 2024-25 के बीच MAB न रखने पर करीब ₹8,932.98 करोड़ जुर्माने के रूप में वसूले।
हालांकि, हाल ही में कई सरकारी बैंकों—जैसे यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया—ने यह जुर्माना खत्म कर दिया है। देश का सबसे बड़ा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) मार्च 2020 से यह जुर्माना नहीं ले रहा है। ICICI बैंक ने कैश जमा पर भी नियम बदले हैं। अब हर महीने 3 मुफ्त नकद लेन-देन की सुविधा होगी, जिसकी कुल राशि ₹1 लाख तक होगी। इसके बाद प्रत्येक लेन-देन पर ₹150 या ₹3.5 प्रति ₹1,000 (जो भी अधिक हो) शुल्क लगेगा।
थर्ड पार्टी (किसी और के जरिए) कैश जमा की सीमा प्रति लेन-देन ₹25,000 होगी। चेक बाउंस पर, अगर ग्राहक द्वारा जमा किया गया चेक वापस होता है तो ₹200 शुल्क लगेगा, और अगर ग्राहक द्वारा जारी किया गया चेक वापस होता है तो ₹500 शुल्क लगेगा।





