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दिव्या देशमुख ने रचा इतिहास, बनीं FIDE वुमेन्स वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली भारतीय महिला

नागपुर की 19 साल की शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने दुनिया भर में भारत का नाम रोशन कर दिया है। उन्होंने FIDE वुमेन्स वर्ल्ड कप 2025 का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है। दिव्या यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं। इससे भी खास बात यह रही कि इस जीत के साथ ही उन्होंने ग्रैंडमास्टर (GM) का टाइटल भी हासिल कर लिया है। यह उनके करियर का सबसे बड़ा मुकाम है, क्योंकि इससे पहले उनके पास एक भी GM नॉर्म नहीं था। अब वह भारत की 88वीं ग्रैंडमास्टर बन गई हैं।

यह ऐतिहासिक जीत रविवार, 27 जुलाई को हुई, जब वर्ल्ड कप के फाइनल में उनका मुकाबला भारत की ही दिग्गज खिलाड़ी कोनेरू हम्पी से हुआ। दोनों के बीच यह फाइनल बेहद कड़ा और रोमांचक रहा, जो टाईब्रेक तक पहुंचा। पहले रैपिड गेम में मुकाबला ड्रॉ रहा, लेकिन दूसरे गेम में दिव्या ने काले मोहरों से खेलते हुए जबरदस्त जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही वह वर्ल्ड कप खिताब जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी भी बन गईं। जीत के बाद उन्होंने कहा, “यह सब किस्मत जैसा लगता है। मेरे पास पहले एक भी GM नॉर्म नहीं था। मैं सोच रही थी कि नॉर्म मिलेगा कहां से, और अब मैं ग्रैंडमास्टर बन गई हूं।”

इस जीत के साथ दिव्या और कोनेरू हम्पी दोनों ने कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई कर लिया है, जो वर्ल्ड चैंपियनशिप की दौड़ में अगला बड़ा कदम होता है। इसका मतलब है कि अब दिव्या के पास वर्ल्ड चैंपियन बनने का भी मौका होगा। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय शतरंज की नई उम्मीद के रूप में स्थापित कर दिया है।

दिव्या देशमुख का सफर नागपुर से शुरू हुआ। वह एक मराठी परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता, डॉ. जितेंद्र और डॉ. नम्रता देशमुख, दोनों डॉक्टर हैं। उन्होंने नागपुर के भावन्स भगवन्दास पुरोहित विद्यालय से पढ़ाई की और बचपन से ही शतरंज में रुचि ली। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी। वर्ष 2021 में वह भारत की 21वीं वुमन ग्रैंडमास्टर बनीं और अगले ही साल 2022 में विमेन्स इंडियन चेस चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया।

दिव्या का अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन भी लगातार शानदार रहा है। वह 2020 में उस भारतीय टीम का हिस्सा थीं जिसने FIDE ऑनलाइन ओलंपियाड में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद 2022 में वह चेस ओलंपियाड में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा रहीं। 2023 में उन्होंने एशियन वुमेन्स चेस चैंपियनशिप और टाटा स्टील इंडिया विमेन्स टूर्नामेंट में जीत हासिल कर देशभर का ध्यान खींचा। उस टूर्नामेंट में उन्होंने हरिका द्रोणावल्ली और कोनेरू हम्पी जैसी दिग्गजों को हराया।

दिव्या का शानदार प्रदर्शन 2024 में भी जारी रहा। मई में उन्होंने शारजाह चैलेंजर्स टूर्नामेंट में जीत हासिल की, और जून में उन्होंने FIDE वर्ल्ड अंडर-20 गर्ल्स चैंपियनशिप में 11 में से 10 मैच जीतकर खिताब अपने नाम किया। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह भारत की सिर्फ चौथी खिलाड़ी बनीं। इसके बाद 2025 की शुरुआत में लंदन में हुए वर्ल्ड रैपिड और ब्लिट्ज टीम चैंपियनशिप में उन्होंने एक और करिश्मा कर दिखाया। उन्होंने विश्व की नंबर 1 महिला खिलाड़ी हौ यिफान को 74 चालों तक चले मुकाबले में हराकर सबको चौंका दिया।

दिव्या देशमुख की इस ऐतिहासिक जीत ने न सिर्फ उन्हें भारतीय शतरंज की नई स्टार बना दिया है, बल्कि पूरी दुनिया में भारत की ताकत को भी दिखा दिया है। उनका यह सफर आने वाली युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है और अब देशभर की नजरें उन पर टिकी हैं कि वह कैंडिडेट्स टूर्नामेंट और विश्व चैंपियनशिप में क्या कमाल करती हैं।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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