एफटीए से भारत को मिलेगा टैक्स फ्री एक्सपोर्ट का मौका, ब्रिटेन को भारत के बाजार में बड़ी एंट्री

भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर आज औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर मौजूद रहे। साथ ही भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी प्रधानमंत्री के साथ थे। इस समझौते को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि यह समझौता ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को हर साल 4.8 अरब पाउंड और वेतन स्तर को 2.2 अरब पाउंड तक बढ़ा सकता है। भारत और ब्रिटेन के बीच वार्षिक व्यापार भी अब 25.5 अरब पाउंड तक पहुंचने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी लंदन दौरे पर पहुंच चुके हैं, जहां उन्हें भारतीय समुदाय ने पारंपरिक जोश और गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। अपने दौरे को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह यात्रा भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। उन्होंने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के लिए समृद्धि, विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में एक अहम कदम होगा। पीएम मोदी ने भारत-ब्रिटेन की मजबूत दोस्ती को वैश्विक तरक्की के लिए जरूरी बताया।
भारत और ब्रिटेन ने इस व्यापार समझौते को अंतिम रूप 6 मई 2025 को लंदन में हुई आखिरी दौर की बातचीत के बाद दिया था। इस समझौते का लक्ष्य 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 120 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। साथ ही 2040 तक इस व्यापार में 40 अरब डॉलर की और वृद्धि करने की योजना बनाई गई है।
समझौते के तहत भारत चमड़े, जूते और तैयार वस्त्र जैसे अपने मुख्य निर्यात उत्पादों पर ब्रिटेन में लगाए गए आयात शुल्क को समाप्त करवा देगा, जिससे इन उत्पादों की मांग में तेजी आने की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर, भारत यूके से आयातित व्हिस्की, जिन, सौंदर्य प्रसाधन, सॉफ्ट ड्रिंक, भेड़ का मांस और कृषि उत्पादों पर टैक्स घटाएगा या समाप्त करेगा। इससे ब्रिटिश उत्पादों को भारत में बाजार मिलेगा, लेकिन इसके साथ ही भारत की घरेलू कंपनियों पर दबाव भी बढ़ सकता है।
सबसे बड़ी चिंता भारत द्वारा कारों पर आयात शुल्क में की गई कटौती को लेकर है। अभी तक कुछ ब्रिटिश कारों पर 100% से भी अधिक शुल्क लगता था, जिसे घटाकर अब 10% किया जा रहा है। इससे भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग पर खतरा बढ़ सकता है और लाखों नौकरियों पर असर पड़ने की आशंका है। इसके साथ ही, एफटीए के तहत ब्रिटेन की कंपनियों को भारत के टेलीकॉम, बैंकिंग और इंश्योरेंस जैसे सेवा क्षेत्रों में बड़ी पहुंच मिलेगी। ब्रिटिश कंपनियां अब भारत की केंद्र सरकार की निविदाओं में भी भाग ले सकेंगी, जिससे भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, भारत को इसके बदले वीज़ा में ज्यादा राहत नहीं मिली है। इसके अलावा, भारत ने बौद्धिक संपदा (IP) से जुड़े कुछ नियमों को भी मान लिया है जो वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) के मौजूदा मानकों से ऊपर हैं। इससे सस्ती दवाओं की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। एक और बड़ा झटका यह है कि भारत को ब्रिटेन की संभावित भविष्य की कार्बन टैक्स नीति से कोई छूट नहीं मिली है। इससे भारत के स्टील और एल्युमिनियम जैसे निर्यात प्रभावित हो सकते हैं।
वाणिज्यिक अनुसंधान संस्थान GTRI की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को इस समझौते से जहां 44% निर्यात पर ड्यूटी फ्री पहुंच और सस्ते ब्रिटिश उत्पादों का फायदा मिलेगा, वहीं दीर्घकालीन रूप में घरेलू उद्योगों, विशेषकर ऑटो और फार्मा सेक्टर को जोखिम भी उठाना पड़ सकता है। हालांकि सरकार का मानना है कि यह समझौता दीर्घकाल में व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा, लेकिन विशेषज्ञों की राय में इस करार का संतुलन भारत के पक्ष में पूरी तरह नहीं है। आने वाले वर्षों में इसके प्रभावों को नज़दीकी से देखना जरूरी होगा।





