रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले: शांति काल एक ‘भ्रम’, सेना को हर वक्त तैयार रहने की जरूरत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि शांति काल एक ‘भ्रम’ है और हमारे सशस्त्र बलों को हमेशा किसी भी अनिश्चित स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए, चाहे माहौल शांतिपूर्ण ही क्यों न दिखे। वे राजधानी दिल्ली में आयोजित डिफेंस अकाउंट्स डिपार्टमेंट (DAD) के कंट्रोलर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस चार दिन चले ऑपरेशन में भारतीय हथियारों और तकनीक के इस्तेमाल ने दुनिया का ध्यान भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता की ओर खींचा है। उन्होंने कहा, “शांति के समय में भी हमें तैयार रहना होगा। किसी भी क्षण हालात बदल सकते हैं और हमारी योजनाएं पूरी तरह से बदल सकती हैं।”
राजनाथ सिंह ने तेज़ फैसलों और ऐसे वित्तीय सिस्टम विकसित करने की ज़रूरत बताई जो इमरजेंसी की स्थिति में भी कारगर साबित हो सकें। उन्होंने रक्षा खातों के अधिकारियों से आग्रह किया कि वे लचीली और नवाचार-प्रधान योजना बनाने की सोच अपनाएं।
7 मई से 10 मई तक चले ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत ने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों पर निशाना साधा। इस अभियान में ‘आकाश तीर’ नामक स्वदेशी एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम की अहम भूमिका रही। इसके अलावा आकाश मिसाइल, समर रिटैलिएशन सिस्टम, लोइटरिंग म्यूनिशन और एंटी-ड्रोन तकनीक का भी इस्तेमाल हुआ।
रक्षा मंत्री ने कहा कि पहले जो हथियार और सिस्टम विदेश से मंगाए जाते थे, अब वे भारत में ही बन रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि भविष्य में बड़े स्तर पर रक्षा उपकरण, जैसे जेट इंजन, भी देश में ही तैयार हों।” राजनाथ सिंह ने DAD अधिकारियों से आंतरिक सुधारों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बाहरी ऑडिट से ज़्यादा ज़रूरी है खुद के कामकाज का आत्म-मूल्यांकन। उन्होंने कहा, “रक्षा खर्च को सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि एक निवेश के रूप में देखना चाहिए। पहले रक्षा बजट को अर्थव्यवस्था से अलग माना जाता था, लेकिन अब यह देश की आर्थिक वृद्धि का हिस्सा बन चुका है।”
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत समेत कई देश अब रक्षा नीति के एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सैन्य क्षमताओं पर बड़ा निवेश हो रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि DAD को अब डिफेंस इकोनॉमिक्स और सैन्य रिसर्च का सामाजिक प्रभाव आंकने जैसे पहलुओं को भी अपनी योजनाओं में शामिल करना चाहिए।
राजनाथ सिंह का यह बयान साफ संकेत है कि भारत अब न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार है, बल्कि आत्मनिर्भर बनते हुए दुनिया में एक मज़बूत रक्षा निर्माता राष्ट्र के रूप में भी उभर रहा है।





