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सरकारी घर पर विवाद के बीच बोले पूर्व CJI – परिवार की स्थिति को समझें

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन इस बार वजह कोई कानूनी फैसला नहीं, बल्कि उनके सरकारी आवास को खाली न करना है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह सुनिश्चित करे कि नवंबर में सेवानिवृत्त हो चुके जस्टिस चंद्रचूड़ जल्द से जल्द सरकारी घर खाली करें।

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर जमकर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने “टैक्सपेयर्स के पैसों” का हवाला देते हुए सवाल उठाए और इस देरी को लेकर आलोचना की। इस बीच, पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने सामने आकर वजह साफ की कि आखिर वे अब तक बंगला क्यों नहीं छोड़ पाए। जस्टिस चंद्रचूड़ ने बताया कि उनकी दो बेटियां प्रियंका और माहि, जिनकी विशेष ज़रूरतें हैं, उनकी देखभाल के चलते घर खाली करना तुरंत संभव नहीं हो पाया। दोनों बेटियां उनके फोस्टर केयर में हैं और उन्हें दिन-रात मेडिकल निगरानी की जरूरत होती है।

उन्होंने बताया कि जिस घर में वे रह रहे हैं, उसे बेटियों की ज़रूरतों के मुताबिक खास तरीके से मॉडिफाई किया गया है, जैसे कि बाथरूम को भी विशेष रूप से बदला गया है। उनका कहना है कि सिर्फ सामान पैक कर दूसरे घर में जाना इतना आसान नहीं है, क्योंकि उनकी बेटियों की देखभाल के लिए घर में ICU जैसी सेटअप की जरूरत है।

सरकार की ओर से उन्हें एक किराए का घर आवंटित किया गया था, लेकिन वो घर पिछले दो साल से खाली पड़ा था और अब उसकी मरम्मत चल रही है। परिवार का अधिकांश सामान पहले से ही पैक है, और जैसे ही नया घर रहने लायक बन जाएगा, वे वहां शिफ्ट हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि प्रियंका को 2021 से ट्रेकियोस्टॉमी (गले में सांस की नली) लगी है और वह BiPAP मशीन के सहारे सांस लेती हैं। कई बार उन्हें वेंटिलेटर पर भी रखा जा चुका है। उनका मेडिकल उपकरण हर हफ्ते बदलना पड़ता है, ताकि संक्रमण से बचाया जा सके।

इस वजह से, घर में ही ICU जैसी व्यवस्था बनाई गई है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने बताया कि उनकी पत्नी कल्पना दिन-रात बेटियों की सेहत को लेकर रिसर्च करती हैं और दुनियाभर के विशेषज्ञों से संपर्क में रहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट प्रशासन से लगातार संपर्क में हैं और घर खाली करने की प्रक्रिया के बारे में सूचित करते रहे हैं। साथ ही उन्होंने अस्थायी रूप से कोई और किराए का घर तलाशने की भी कोशिश की थी, लेकिन इतनी कम अवधि के लिए सही घर मिलना मुश्किल रहा।

पूर्व CJI के दो बेटे – अभिनव और चिंतन चंद्रचूड़ – दोनों ही वकील हैं और अलग-अलग कानूनी क्षेत्रों में कार्यरत हैं। चंद्रचूड़ दंपति अपनी बेटियों की देखभाल को प्राथमिकता देते हुए, ज्यादातर समय घर पर ही रहते हैं और बाहर जाना बहुत कम करते हैं।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने सरकारी घर खाली न कर पाने की वजह इंसानियत और जिम्मेदारी से जुड़ी बताते हुए साफ कर दिया है कि ये मामला सिर्फ विलंब का नहीं, बल्कि एक संवेदनशील पारिवारिक परिस्थिति का है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि जैसे ही नया घर तैयार हो जाएगा, वे तुरंत शिफ्ट हो जाएंगे।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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