अंतरिक्ष से लौटने के बाद सुनीता विलियम्स को झेलनी पड़ेंगी ये स्वास्थ्य चुनौतियां

NASA की जानी-मानी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विलमोर आखिरकार 9 महीने अंतरिक्ष में बिताने के बाद पृथ्वी पर लौट रहे हैं। यह मिशन केवल 8 दिनों का होना था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण यह अप्रत्याशित रूप से लंबा हो गया। स्पेसएक्स ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने 18 मार्च 2025 को सुबह 10:35 बजे (IST) अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सफलतापूर्वक अनडॉक किया और करीब 17 घंटे की यात्रा के बाद पृथ्वी पर लौटने की प्रक्रिया शुरू की। उनके साथ NASA के निक हेग और रूसी कॉस्मोनॉट एलेक्जेंडर गोर्बुनोव भी लौट रहे हैं।
अंतरिक्ष में 9 महीने बिताने के बाद क्या होंगे स्वास्थ्य पर प्रभाव?
अंतरिक्ष में भारहीनता (Zero Gravity) का असर रोमांचक जरूर लगता है, लेकिन यह शरीर के लिए कई तरह की चुनौतियां पैदा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर पृथ्वी पर लौटेंगे, तो उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
1.शरीर के संतुलन पर असर
गुरुत्वाकर्षण की कमी का सबसे पहला प्रभाव शरीर के संतुलन पर पड़ता है। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA के अनुसार, कम गुरुत्वाकर्षण के कारण कान के अंदर मौजूद वेस्टिबुलर ऑर्गन की कार्यप्रणाली बदल जाती है, जिससे मस्तिष्क को संतुलन बनाए रखने में परेशानी होती है। इस कारण लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को चक्कर आना, संतुलन खोना और चलने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
2.हड्डियों और मांसपेशियों पर प्रभाव
NASA के अनुसार, भारहीनता के कारण हर महीने अंतरिक्ष यात्रियों की हड्डियों की घनत्व (Bone Density) लगभग 1% तक कम हो जाती है। लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से हड्डियों की कमजोरी और मांसपेशियों में गिरावट देखी जाती है। यही कारण है कि ISS पर अंतरिक्ष यात्रियों के लिए प्रतिदिन दो घंटे की एक्सरसाइज अनिवार्य होती है।
3.रक्त प्रवाह और हृदय पर प्रभाव
पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण शरीर के तरल पदार्थों को नीचे की ओर बनाए रखता है, लेकिन अंतरिक्ष में यह प्रभाव खत्म हो जाता है, जिससे तरल पदार्थ सिर और ऊपरी हिस्से में जमा हो जाते हैं। जब अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौटते हैं, तो खड़े होने पर चक्कर आने की समस्या हो सकती है, जिसे “ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन” कहा जाता है।
4.आंखों और त्वचा पर प्रभाव
अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने से अंतरिक्ष यात्रियों की दृष्टि पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, भारहीनता की स्थिति में त्वचा की ऊपरी परत का झड़ना भी एक सामान्य समस्या है, जिसे “बेबी फीट” कहा जाता है।
5.बोलने और भाषा पर असर
कनाडा के अंतरिक्ष यात्री क्रिस हैडफील्ड के अनुसार, अंतरिक्ष में जीभ और होठों का भार महसूस नहीं होता, जिससे वहां बात करने का तरीका बदल जाता है। पृथ्वी पर लौटने के बाद उन्हें अपनी आवाज और उच्चारण को फिर से समायोजित करना पड़ा था।
धरती पर लौटने के बाद कैसी होगी रिकवरी?
अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर को फिर से गुरुत्वाकर्षण के अनुकूल बनाने में कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, उनके लिए खास मेडिकल मॉनिटरिंग, संतुलन सुधारने की थेरेपी और शारीरिक व्यायाम की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। NASA और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियां सुनिश्चित करेंगी कि सुनीता विलियम्स और उनकी टीम को स्वास्थ्य संबंधी किसी गंभीर समस्या का सामना न करना पड़े।





