“विपक्ष का षड्यंत्र कामयाब नहीं होगा…”: अखिलेश को CM योगी का जवाब

प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ को लेकर अखिलेश यादव और सीएम योगी आदित्यनाथ के बीच जंग छिड़ गई है. संसद में अखिलेश यादव की ओर से उठाए गए सवालों का सीएम योगी ने करारा जवाब दिया. योगी ने कहा कि विपक्ष का षड्यंत्र कामयाब नहीं होगा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का बयान शर्मनाक है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जहां एक ओर पूरा देश और दुनिया सनातन धर्म के इस सबसे बड़े आयोजन का साक्षी बनकर गौरव की अनुभूति कर रही है, प्रफुल्लित है. वहीं दूसरी ओर सनातन धर्म के खिलाफ षड्यंत्र करने वाले तत्वों द्वारा लगातार झूठ और असत्य के नए प्रतिमान गढ़े जा रहे हैं…देश की संसद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का वक्तव्य इस ओर सबका ध्यान आकर्षित करता है. यह दोनों वक्तव्य ना केवल इनके सनातन धर्म विरोधी चरित्र को उजागर कराता है बल्कि इनकी उस गिद्ध दृष्टि की ओर भी सबका ध्यान आकर्षित करता है जो पहले दिन से लगातार महाकुंभ के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं.”
सीएम योगी ने आगे अपने बयान में कहा, “न केवल सनातन धर्म पर प्रहार है बल्कि निंदनीय और शर्मनाक भी है. कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में हजारों लोगों की मौत हुई. हमें अफसोस होता है, एक इतने वरिष्ठ नेता और सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह संसद में इस तरह का विवादित बयान दें और गुमराह करें…सपा प्रमुख ने भी ऐसा ही बयान दिया…दोनों दलो में एक प्रतिस्पर्धा है कि कौन कितना सनातन विरोधी वक्तव्य दे सके…यह एक दुखद घटना थी…ये दोनों दल और सनातन धर्म विरोधी चाहते थे कि कोई बड़ा हादसा हो जाए. हमारी पहली प्राथमिकता दुर्घटना रहित मेला सुनिश्चित करना था लेकिन दुर्भाग्य से यह घटना घटित हुई…हमने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और आर्थिक मुआवजे की घोषणा की…पिछले 22 दिनों में 38 करोड़ श्रद्धालु यहां आ चुके हैं. अगले 22-23 दिनों में और भी श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है…इन दलों की साजिश सफल नहीं होगी. हम 29 जनवरी को हुई घटना की तह तक जाएंगे.”
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रयागराज महाकुंभ में मची भगदड़ के मारे गए लोगों के आंकड़े छिपाए जाने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को मांग की कि महाकुंभ की व्यवस्था के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और वहां विभिन्न व्यवस्थाएं सेना के हवाले की जाएं.




