कौन है शांतनु नायडू? रतन टाटा के देहांत के बाद बटोरी सुर्खियां, जानें क्या था दिवंगत टाटा से कनेक्शन

कौन है शांतनु नायडू? रतन टाटा के देहांत के बाद बटोरी सुर्खियां, जानें क्या था दिवंगत टाटा से कनेक्शन
देश के दिग्गज उद्योगपति व टाटा संस के चेयरमैन रतन टाटा ने बीती रात दुनिया को अलविदा कह दिया है। उन्होंने कल ही रात में ब्रीच कैंडी अस्पताल में आखिरी सांस ली है। ऐसे में देश व दुनियां की हस्तियां उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं, इस दौरान कई लोग उनसे जुड़ी यादें भी साझा का रहे हैं। इन सबके बीच एक नव युवक की खूब चर्चा हो रही हैं। यह युवक 28 वर्षीया शांतनु नायडू हैं, जो बीते कई वर्षों से रतन टाटा के साथ दिखाई दे रहे थे।
कौन हैं शांतनु नायडू ?
शांतनु नायडू ने दिवंगत अरबपति उद्योगपतियों के साथ एक उल्लेखनीय रिश्ता बनाया था। दरअसल वह टाटा ग्रुप में डिप्टी जनरल मैनेजर के पोस्ट पर काम कर रहे हैं। बता दें कि काफी वक्त तक रतन टाटा के असिस्टेंट रहे। मुंबई के रहने वाले शांतनु नायडू ऐसे खुशनसीब युवा हैं, जिनसे प्रभावित होकर रतन टाटा ने खुद फोन करके कहा था कि आप जो करते हैं मैं उससे बहुत प्रभावित हूं। क्या आप मेरा असिस्टेंट बनना चाहेंगे।’ ऐसे में लोग जानना चाहेंगे कि, आखिर इतने कम उम्र में कैसे वह लड़का रतन टाटा का करीबी बन गया।
28 साल की उम्र में शांतनु नायडू ने बिजनेस इंडस्ट्री में काफी बड़ा मुकाम हासिल किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शांतनु नायडू रतन टाटा को स्टार्टअप्स में निवेश के लिए बिजनेस टिप्स देते थे। शांतनु नायडू का जन्म 1993 में पुणे महाराष्ट्र में हुआ था। कम उम्र में शांतनु प्रसिद्ध भारतीय व्यवसायी, इंजीनियर, जूनियर असिस्टेंट, डीजीएम, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, लेखक और उद्यमी के तौर पर देश विदेश में जाने जाते हैं। शांतनु नायडू टाटा ट्रस्ट के उप महाप्रबंधक के रूप में काफी पॉपुलर रहे हैं।
रतन टाटा से जुड़ने से पहले क्या काम करते थे शांतनु
शांतनु पशुप्रेमी हैं। उन्होंने आवारा कुत्तों के लिए एक रिफ्लेक्टर बनाया था, डॉग कॉलर। इसका मकसद था आवारा कुत्तों को सड़क दुर्घटनाओं से बचाना। दरअसल, आवारा कुत्ते कई बार सड़क हादसों का शिकार हो जाते थे, क्योंकि ड्राइवर उन्हें देख नहीं पाते थे। शांतनु का बनाया डॉग कॉलर कुत्तों के गले में चमकता और ड्राइवर उन्हें देखकर रफ्तार धीमी कर देते। इससे सैकड़ों कुत्तों की जान बची।
रतन टाटा से ऐसे जुड़े शांतनु
शांतनु ने अपने डॉग कॉलर के बारे में एक फेसबुक पोस्ट में लिखा। मीडिया में भी उनके काम की रिपोर्ट हुई। शांतनु का काम रतन टाटा तक भी पहुंचा और वे शांतनु से काफी प्रभावित हुए। रतन टाटा भी पशप्रेमी हैं और उन्हें खासतौर पर कुत्तों से काफी लगाव है। उन्होंने शांतनु को खुद फोन करके बुलाया और अपना असिस्टेंट बनने का ऑफर दिया।





