काम का दबाव या फिर कुछ और… HDFC में महिलाकर्मी की काम के दौरान मौत

लखनऊ: अर्न्स्ट एंड यंग (EY) की 26 वर्षीय पुणे कर्मचारी की मौत के बाद अब उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी एक महिला कर्मचारी की मौत का मामला सामने आया है. बता दें कि लखनऊ में HDFC बैंक में काम कर रही एक कर्मचारी की कार्य के दौरान ही संदिग्ध परिस्थिती में मौत हो गई. जिसके बाद पुलिस की एक टीम वहां पहुंची और पुलिस ने क्रमचारी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
बताया जा रहा है कि महिला अपनी कुर्सी से गिर गई और मौके पर ही उसकी मौत हो गई. पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस आयुक्त राधारमण सिंह ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के बाद ही मौत के कारणों का पता चल पाएगा.
वहीं इस घटना को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रया दी है. अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लिखा, लखनऊ में काम के दबाव और तनाव के कारण एचडीएफ़सी की एक महिलाकर्मी की ऑफिस में ही, कुर्सी से गिरकर, मृत्यु का समाचार बेहद चिंतनीय है. ऐसे समाचार देश में वर्तमान अर्थव्यवस्था के दबाव के प्रतीक हैं. इस संदर्भ में सभी कंपनियों और सरकारी विभागों तक को गंभीरता से सोचना होगा. ये देश के मानव संसाधन की अपूरणीय हानि है. ऐसे आकस्मिक निधन काम के हालातों को सवालों के घेरे में ले आते हैं. किसी भी देश की असली तरक़्क़ी का पैमाना सेवा या उत्पाद के आँकड़े का बढ़ना नहीं होता बल्कि ये होता है कि व्यक्ति मानसिक रूप से कितना स्वतंत्र, स्वस्थ व प्रसन्न है. भाजपा सरकार की नाकाम आर्थिक नीतियों के कारण कंपनियों का काम-कारोबार इतना घट गया है कि अपने व्यापार-व्यवसाय को बचाने के लिए वो कम लोगों से कई गुना काम करवाती हैं. ऐसी आकस्मिक मृत्यु के लिए जितनी भाजपा सरकार ज़िम्मेदार है उतने ही जनमानस को मानसिक रूप से हतोत्साहित करनेवाले भाजपाइयों के बयान भी. इस समस्या से उबरने के लिए कंपनियों और सरकारी विभागों को ‘तत्काल सुधार’ के लिए सक्रिय और सार्थक प्रयास करने चाहिए.
इसी के साथ सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार पर भी आरोप लगाया. उन्होंने आगे कहा, “भाजपा सरकार की नाकाम आर्थिक नीतियों के कारण कंपनियों का काम-कारोबार इतना घट गया है कि अपने व्यापार-व्यवसाय को बचाने के लिए वो कम लोगों से कई गुना काम करवाती हैं. ऐसी आकस्मिक मृत्यु के लिए जितनी भाजपा सरकार ज़िम्मेदार है उतने ही जनमानस को मानसिक रूप से हतोत्साहित करनेवाले भाजपाइयों के बयान भी. इस समस्या से उबरने के लिए कंपनियों और सरकारी विभागों को ‘तत्काल सुधार’ के लिए सक्रिय और सार्थक प्रयास करने चाहिए.





